
Ranchi: झारखंड कांग्रेस में काफी छीछालेदर के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने इस्तीफा दे दिया है. पांच पन्नों के इस्तीफा पत्र में उन्होंने कांग्रेस के अपने सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाये हैं.
इस्तीफे में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि डॉ अजय ने अपने कांग्रेस सहयोगियों की तुलना संगीन अपराधियों से कर दी है. उन्होंने साफ कहा है कि हमारे पास ओछे स्वार्थ वालों की लंबी सूची है. उनका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हथियाना, टिकट बेचना या चुनाव के नाम पर धन जमा करना है. एक गर्वित भारतीय और पुलिस वीरता पुरस्कार के सबसे कम उम्र के विजेताओं में से एक और जमशेदपुर में माफिया का सफाया करने वाले के रूप में, मैं आत्मविश्वास से कह सकता हूं कि सबसे खराब से खराब अपराधी भी मेरे इन सहयोगियों से बेहतर दिखते हैं.
सुबोधकांत सहाय क्षुद्र व्यक्तिगत लाभ उठाने वाले
अपने लिखे पत्र में उन्होंने जहां पार्टी प्रवक्ता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक के कार्यकाल के दौरान (इसमें उनके कार्यकाल के दौरान हुए लोकसभा और उपचुनाव भी शामिल हैं) कांग्रेस पार्टी की सेवा का ज़िक्र किया है वहीं सुबोधकांत सहाय, रामेश्वर उरांव, प्रदीप बालमुचू, चंद्रशेखर दुबे, फुरकान अंसारी सहित कई अन्य वरिष्ठ नेताओं पर क्षुद्र व्यक्तिगत लाभ के लिए पार्टी हित को ताक में रखकर काम करने का आरोप लगाया है.
उन्होंने कहा है कि प्रदेश अध्यक्ष बनने के डेढ़ साल तक उन्होंने कांग्रेस पार्टी को ब्लॉक स्तर से प्रदेश स्तर तक खड़ा करने का अथक प्रयास किया है. उनकी इस ईमानदार प्रयासों के समक्ष पार्टी के ही उपरोक्त तथाकथित नेता अवरोध खड़ा करते रहे.
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कुछ नेताओं के निजी हित की वजह से हुई हार
अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उनका एकमात्र लक्ष्य पार्टी को व्यक्तिवाद, क्षुद्र लक्ष्य और स्वार्थी मानसिकता से बाहर निकालकर एक एकीकृत और जिम्मेदार संगठन की तरफ ले जाना था. यही कारण है कि राज्य में कांग्रेस पार्टी की जमीनी ताकत आज काफी बढ़ गयी है.
लोकसभा चुनाव में कम सीटों पर लड़ने के बावजूद पार्टी का वोट शेयर काफी बढ़ा. लोकसभा चुनाव में झारखंड की 6 सीटो पर पार्टी के जीत की संभावना थी, यदि पार्टी के कुछ नेता निजी हित के जगह काम करते. लेकिन दुर्भाग्य है कि सुबोधकांत सहाय, रामेश्वर उरांव, प्रदीप बलमूचु, चंद्रशेखर दुबे, फुरकान अंसारी और कई अन्य वरिष्ठ नेता अपने राजनीतिक पदों को हथियाने में लगे रहे. और क्षुद्र व्यक्तिगत लाभ के लिए पार्टी हित को ताक में रखने का हर संभव प्रयास किया. उनके इन अवरोधों के बावजूद उनके नेतृत्व में 2014 के लोकसभा चुनाव की तुलना में 2019 में कांग्रेस पार्टी के वोट शेयर में 12% का उछाल देखने को मिला.
मुझ पर गुंडो से हमला करवाया
डॉ अजय कुमार ने कहा कि इस परिस्थिति में पार्टी हित में काम करना आसान नहीं था. लेकिन उनके धैर्य तब टूटा, जब पार्टी के तथाकथित सदस्यों ने मुझ पर पार्टी कार्यालय में हमला करने के लिए गुंडों को काम पर रखा.
सुबोधकांत सहाय जैसे तथाकथित कद्दावर नेता का प्रदेश पार्टी मुख्यालय में किन्नरों से उत्पात मचाने के लिए प्रोत्साहित करना एक बेहतरीन और घटिया हरकत थी. राज्य के चंद नेता पैसे की ताकत पर लोगों को दिल्ली ले जाते हैं और राज्य में पार्टी के बारे में झूठी कहानी बनाने के एकमात्र उद्देश्य से उन्हें होटलों में ठहराते हैं.
विडंबना यह है कि यह तथाकथित वरिष्ठ नेता इस तरह की गतिविधियों पर तो पैसा खर्च करने को तैयार है, पर उनमें से एक भी 5000 रुपये पार्टी हित में योगदान करने को भी तैयार नहीं है.
उन्होंने कहा है कि पार्टी हित से ऊपर उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता नहीं दी. इसलिए 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान जमशेदपुर के अपने पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र से उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा. ऐसा झारखंड में गठबंधन की मजबूती को लेकर उन्होंने यह निर्णय लिया था.
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परिवारवाद को बढ़ावा देने पर है कांग्रेसियों का जोर
डॉ अजय ने कहा कि राज्य के सभी कांग्रेसी वरिष्ठ नेता केवल अपने परिवारों के लिए लड़ते हैं. एक नेता अपने लिए बोकारो से सीट चाहता है, तो पलामू से अपने बेटे के लिए. एक नेता हटिया से अपने भाई के लिए सीट चाहता है तो दूसरा नेता घाटशिला से अपनी बेटी के लिए. वही नेता खूंटी से भी चुनाव लड़ना चाहते हैं.
इसी तरह एक नेता जामताड़ा से अपने बेटे के लिए, मधुपुर से अपनी बेटी के लिए और महागामा से अपने लिए सीट चाहते हैं. यहां तक कि ये तथाकथित नेता महागठबंधन का तभी तक समर्थन करते हैं, जब तक उनकी सीट सुरक्षित रहती है. एक नेता अब तक लगातार लड़े तमाम चुनाव हार कर भी गुमला से एक सीट चाहते हैं. ऐसे नेता महागठबंधन का तभी तक समर्थन करते हैं जब तक उनकी सीट सुरक्षित रहती है. ऐसा नहीं होने पर वह तबाही मचाने को भी तैयार रहते है.
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