
New Delhi: देश के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार डॉ के विजय राघवन ने कहा है कि कोविड-19 के लिए देश में वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया 4 तरीके से चल रही है और अक्टूबर तक इसके पहले पायदान पर चढ़ने की उम्मीद है.
गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि अक्टूबर तक कुछ कंपनियों को इसकी प्री क्लीनिकल स्टडीज तक पहुंचने में सफलता मिल सकती है.
प्रेस कांफ्रेंस में सरकार ने यह भी जानकारी दी कि देश में कोविड के 86110 ऐक्टिव केस हैं और 67691 लोग स्वस्थ हो चुके हैं. पिछले 24 घंटे में 3266 लोग ठीक हुए हैं. रिकवरी रेट 42.75 फीसदी है.
कोरोना की वजह से देश में 13 शहरों की हालत ज्यादा खराब है. यहां पर 70 प्रतिशत केस हैं. इसमें मुंबई, चेन्नै, दिल्ली, अहमदाबाद, ठाणे, पुणे, हैदराबाद, कोलकाता, इंदौर, जयपुर, जोधपुर, चेंगलपट्टू और तिरुवल्लुर शामिल हैं.
दुनिया में वैक्सीन बनाने की चार प्रक्रिया
राघवन ने बताया कि दुनियाभर में वैक्सीन बनाने की चार प्रक्रिया है. भारत में इन चारों पद्धतियों का इस्तेमाल कोविड-19 के लिए वैक्सीन बनाने में किया जा रहा है.
राघवन ने कहा, “कुछ कंपनियां एक फ्लू वैक्सीन के बैकबोन में आरऐंडडी कर रहे हैं, लगता है अक्टूबर तक प्री क्लीनिकल स्टडीज हो जायेगी. कुछ फरवरी 2021 तक प्रोटीन बनाकर वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया में जुटे हैं.
कुछ स्टार्टअप्स और कुछ अकैडमिक्स भी वैक्सीन बनाने की तैयारी कर रहे हैं. साथ ही हम विदेशी कंपनियों से भी साझेदारी कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि कुछ विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी में हम अगुवाई कर रहे हैं जबकि कुछ की अगुवाई में हम अपना योगदान दे रहे हैं.
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2 से 3 अरब डॉलर होंगे खर्च
डॉ राघवन ने कहा कि आम तौर पर वैक्सीन बनाने में 10 से 15 साल लग जाते हैं और उनकी लागत 20 करोड़ से 30 करोड़ डॉलर तक आती है.
चूंकि कोविड-19 के लिए एक साल में वैक्सीन विकसित करने का लक्ष्य है, ऐसे में खर्च बढ़कर सौ गुना यानी 20 अरब से 30 अरब डॉलर हो सकता है.
उन्होंने कहा- “हमें कई मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ना होगा। इसमें रेग्युलेटरी लेवल से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को तेज करना होगा और तब लागत बढ़कर 2 से 3 अरब डॉलर हो सकती है.”
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भारत के वैक्सीन दुनिया में टॉप
डॉ राघवन ने कहा कि भारत में तैयार वैक्सीन दुनिया में टॉप क्लास के हैं. देश के लिए गौरव की बात है कि दुनियाभर के बच्चों को जो तीन वैक्सीन दिये जाते हैं, उनमें दो भारत में बनते हैं.
पिछले कुछ वर्षों में वैक्सीन कंपनियां न केवल मैन्युफैक्चरिंग कर रही हैं बल्कि आरऐंडडी में भी निवेश कर रही हैं. इसी तरह हमारे स्टार्टअप्स भी इस क्षेत्र में बड़ा योगदान कर रहे हैं.
इनके अलावा, इंडिविजुअल अकैडिमिक भी यह काम कर रहे हैं.
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