
Guwahati : सरकार ने सोमवार को असम के खूंखार उग्रवादी समूहों में से एक नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये जिसमें उसे राजनीतिक और आर्थिक फायदे दिये गये हैं लेकिन अलग राज्य या केंद्रशासित क्षेत्र की मांग पूरी नहीं की गयी है. समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों में ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) और यूनाइटेड बोडो पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन भी शामिल हैं. जान लें कि ABSU 1972 से ही अलग बोडोलैंड राज्य की मांग के लिए आंदोलन चला रहा है.
इसे भी पढ़ें : कांटों पर खिला कमल: क्या #The Economist पत्रिका विश्व में भारत की छवि को खराब करना चाहती है?
मोदी सरकार को बड़ी सफलता हाथ लगी

पूर्वोत्तर के राज्यों से उग्रवाद के खात्मे का वादा करके सत्ता में आयी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को इस दिशा में सोमवार को बड़ी सफलता हाथ लगी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो उग्रवादियों के प्रतिनिधियों ने असम समझौता 2020 पर हस्ताक्षर किये.
इस समझौते के साथ ही लगभग 50 साल से चला रहा बोडोलैंड विवाद समाप्त हो गया. इस मौके पर गृह मंत्री ने ऐलान किया कि उग्रवादी गुट नैशनल डेमोक्रैटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड के 1550 कैडर 30 जनवरी को अपने 130 हथियार सौंप देंगे और आत्मसमर्पण कर देंगे।
जान लें कि इस विवाद में अब तक 2823 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. खबरों के अनुसार पिछले 27 साल में यह तीसरा असम समझौता है. सूत्रों के अनुसार इस विवाद के जल्द समाधान के लिए मोदी सरकार लंबे समय से प्रयासरत थी. अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद इसमें काफी तेजी आयी है.
इसे भी पढ़ें : Historian Romila Thapar, नसीरुद्दीन शाह, मीरा नायर समेत 300 हस्तियों ने #CAA_NRC के विरोध में किये हस्ताक्षर
गृह मंत्री ने समझौते को ऐतिहासिक करार दिया
गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में त्रिपक्षीय समझौते पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, एनडीएफबी, एबीएसयू के चार धड़ों के शीर्ष नेता, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्येन्द्र गर्ग और असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्णा ने हस्ताक्षर किये. गृह मंत्री ने समझौते को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि इससे बोडो लोगों की दशकों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान होगा. उन्होंने कहा, इस समझौते से बोडो क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास होगा और असम की क्षेत्रीय अखंडता से समझौता किये बगैर उनकी भाषा और संस्कृति का संरक्षण होगा.
गृह मंत्री ने कहा कि बोडो उग्रवादियों की हिंसा में पिछले कुछ दशकों में चार हजार से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी. शाह ने कहा कि असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जायेगी, असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि समझौते के बाद राज्य में विभिन्न समुदाय सौहार्द के साथ रह सकेंगे.
एनडीएफबी के 1550 उग्रवादी 30 जनवरी को हथियार छोड़ देंगे
केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि समझौते से बोडो मुद्दे का व्यापक समाधान होगा. उन्होंने कहा, यह ऐतिहासिक समझौता है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि समझौते के अनुसार एनडीएफबी के 1550 उग्रवादी 30 जनवरी को हथियार छोड़ देंगे, अगले तीन वर्षों में 1500 करोड़ रुपये का आर्थिक कार्यक्रम लागू किया जायेगा.
जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों की 750 — 750 करोड़ रुपये की बराबर भागीदारी होगी. उन्होंने कहा कि बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद् (बीटीसी) के वर्तमान ढांचे को और शक्तियां देकर मजबूत किया जायेगा तथा इसकी सीटों की संख्या 40 से बढ़ाकर 60 की जायेगी.
बोडो बहुल गांवों को बीटीसी में शामिल करने और जहां बोडो की बहुलता नहीं है, उन्हें बीटीसी से बाहर निकालने के लिए आयोग का गठन होगा. यह पिछले 27 वर्षों में तीसरा बोडो समझौता है. अलग बोडोलैंड राज्य के लिए चले हिंसक आंदोलन में सैकड़ों लोगों की जान चली गयी और सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों को नुकसान हुआ.
समझौते के बाद विरोध प्रदर्शन
विभिन्न बोडो पक्षकारों के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर के केंद्र के कदम के विरोध में गैर बोडो संगठनों द्वारा सोमवार को आहूत 12 घंटे के बंद के कारण असम में बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) के तहत आने वाले चार जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कोकराझार, बक्सा, चिरांग और उदलगुड़ी जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन बंद का असर राज्य के अन्य हिस्सों पर नहीं पड़ा है.
कोकराझार जिले के कुछ हिस्सों में टायर जलाये गये, लेकिन अब तक किसी अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं है. सभी शैक्षिक संस्थान बंद रहे. हालांकि, कॉलेजों में पूर्व निर्धारित कुछ परीक्षाएं हुईं. सड़कों पर वाहनों की आवाजाही नजर नहीं आयी और सभी दुकानें तथा कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे.
इसे भी पढ़ें : #Plane_Crash : हेरात से दिल्ली आ रहा एरियाना अफगान एयरलाइंस का विमान दुर्घटनाग्रस्त, 110 यात्री थे सवार




