
Pravin kumar
Ranchi: कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 14 अप्रैल तक देश को लॉकडाउन किया गया है. इस आपदा से मुकाबले के लिए राज्य सरकार के द्वारा कई तरह के प्रयास भी किये जा रहे हैं.
सरकार की ओर से कई तहत की राहत की घोषणाएं की जा रही हैं, जिसमें पीडीएस लाभुकों को दो माह का अग्रिम राशन देना एक अहम निर्णय है.
झारखंड सरकार ने आदेश जारी कर अप्रैल एवं मई महीने का खाद्यान्न एकमुश्त देने का निर्देश दिया है. लेकिन राज्य में पीडीएस डीलरों के जो काले कारनामे सामने आ रहे हैं वे सरकार के मकसद को तार-तार करने के लिए काफी हैं.
भले ही राज्य कोरोना का जंग जीत ले, लेकिन पीडीस डीलरों के जो मामले सामने आ रहे हैं वे ग्रामीण अंचल को इस संकट की घड़ी में भी भूखमरी की ओर धकेलने का काम कर रहे हैं. सकट की इस घड़ी में भी जरूरतमंदों के हिस्से का राशन डकारने में पीछे नहीं हैं.
सरकार के द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान सभी लाभुकों को राशन मुहैया हो पाये, यह अंचल अधिकारी सुनिश्चित करें. वहीं अंचल अधिकारियों के द्वारा यह जिम्मेवारी पंचायत के मुखिया को दी गयी है.
अंचल के द्वारा स्पष्ट निर्देश दे दिया गया है कि कोई भी व्यक्ति भूखा ना रहे. अगर किसी तरह की अनहोनी होती है तो इसका दयित्व मुखिया का होगा. क्या यह व्यवस्था राज्य के पीडीएस को सुदृढ़ कर पायेगी?
इस सिस्टम में सुधार के लिए राज्य सरकार को काम करना चाहिए. तभी कोरोना संकट से जनित भूख से राज्य मुकाबला कर पायेगा.
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राज्य में कार्डधारियों की संख्या 57.13 लाख
वर्तमान में राशन कार्डधारियों की संख्या 57.13 लाख है. सरकारी आंकड़े के मुताबिक, 2.33 करोड़ लोगों को राशन दिया जाता है. मतलब एक राशन कार्ड में औसतन एक परिवार के पांच सदस्यों को भोजन मिलता है.
सरकार अगर पीडीएस सिस्टम को दुरुस्त कर दे तो कोरोना जनित भूखमरी से जीत सकती है.
पीडीएस डीलरों पर हाल के दिनों में हुई कार्रवाई और लगे आरोप
मंगलवार को रांची जिले के विभिन्न अंचलों के सात पीडीएस डीलरों का लाइसेंस निलंबित किया गया. इनपर समय पर राशन उपलब्ध नही कराने, राशन का गबन, कम राशन देने जैसे कई अरोप प्रमाणित हुए.
ऐसे मामले राज्य भर में देखे जा रहे है. इन मामलों में कार्रवाई तो हो रही है इसके बावजूद ऐसे मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे.
पलामू जिला के सतबरवा प्रखंड के पोंची निवासियों को पिछले तीन महीने से राशन नही मिलने का मामला सुलझा नहीं हैं. राशन डीलर पर खाद्यान्न की कालाबाजारी करने के आरोप में प्रशासन ने सतबरवा थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है.
इसी बीच छत्तरपुर प्रखण्ड के मझौली गांव के 27 लाभुकों ने राशन डीलर देवी मां स्वयं सहायता समूह पर सितंबर 2019 से मार्च 2020 तक राशन नहीं देने का आरोप लगाया, जिसकी जांच छत्तरपुर एमओ कर रहे हैं.
शुक्रवार 4 अप्रैल को एमओ ने जांच की और लाभुकों के द्वारा शिकायत को सही पया गया. एमओ ने कार्रवाई के नाम पर मात्र अप्रैल एवं मई का राशन देने का निर्देश दिया. जबकि मार्च का राशन लाभुकों को मिला नहीं है. इसे लेकर डीलर पर प्रथामिकी करने की बात कही.
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नया मामला पलामू के हैदरनगर प्रखंड का
पलामू जिले के ही हैदरनगर प्रखण्ड अन्तर्गत बरवाडीह गांव के 47 लाभुकों ने राशन डीलर रमेश राम पर फरवरी व मार्च 2020 का राशन वितरण किये वगैर उनके राशन कार्ड में फर्जी प्रवृष्टि करने का आरोप लगाते हुए संबंधित एमओ को शिकायत आवेदन पत्र सौंपा है.
इन हालात से मुकाबले के लिए सरकार के सामने व्यवस्था दुरुस्त करने की चुनौती
कोरोना संकट से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में खड़े हुए सवालों से जूझने के लिये राज्य सरकार को अपनी व्यव्स्था दुरुस्त करने की पहल करनी चहिए.
राशन डीलरों पर भी निगरानी की व्यवस्था सरकार को करनी होगी.तभी गरीबों को सही में खाद्यान्न मिल पायेगा, अन्यथा संकट की इस घड़ी में भी बेइमान डीलर अपनी तिजोरी भरने में लगे रहेंगे.
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