Tirhut Diary ( तिरहुत डायरी )

जब खट्टरकाका का कान कौआ ले गया

Vijay Deo Jha

#खट्टरकाका की डायरी से

चश्मा नहीं मिल पा रहा था. कुछ–कुछ याद आ रहा था कि ऑफिस से निकलते समय चश्मा तो मैंने पहना था, फिर कहां गया. तब चश्मा कहीं गिर गया. चश्मा तो कान के खोपचे पर टिका होता है, गिरने का सवाल ही नहीं है मतलब कौआ मेरा कान ले गया. ध्यान आया कि ऑफिस जाते समय मैंने पेड़ के नीचे संजय की दुकान पर चाय पी थी, जहां ढेर सारे कौवे रहते हैं. शक पुख्ता हो गया कि चश्मा के साथ-साथ कान भी गया. कान की खोज जरूरी है क्योंकि मैं वैसे भी अकान बथान आदमी हूं, अब कान नहीं रहेगा तो कोई भी अनेरुआ बपजेठ मेरी दुर्दशा कर जाएगा. और कनबुच्चा तो कहा ही जाएगा.

निश्चय कर लिया कि कान प्राप्त कर रहूंगा और उस दुष्ट कौवे को सजा दूंगा. संजय की दुकान के सामने की दुकान में CCTV है, वहां प्रेस कार्ड दिखाकर कुछ कौवे की पहचान करबायी. म्यूनिसपैलिटी वाले से लेकर पुलिस वालों तक को चोर कौवा को पकड़वाने में लगा दिया. शुरू में पुलिस मेरे कम्प्लेन पर ध्यान नहीं दिया, तो मैंने शहर कोतवाल से लयात्मक तरीके से शिकायत की जैसा की अखबारों में शीर्षक दिया जाता है.

“सरजी सरजी कौआ ले गया मेरा कान

पुलिस करती नहीं कारवाई.”

शहर कोतवाल ने भी कविता में जबाब दिया

पुलिस का है यह फ़र्ज़

करेगी कैसे नहीं कारबाई

आपको मिलेगा न्याय

चार घंटे की मेहनत के बाद कुछ हिस्ट्रीशीटर कौवे पकड़ लिए गए. कड़ी पूछताछ और पिटाई के बाद भी कौवों ने कान चोरी में अपनी संलिप्तता से इंकार किया. अब कौवे हुजूम में थाने के बाहर के पेड़ पर जम गए. उनका कहना था की सदियों से उन पर कान चोरी का इल्जाम लगाया जाता रहा है, लेकिन कौवों के पास से कान बरामदगी की बात तो दूर आज तक आरोप साबित नहीं हो पाया है. अब थानेदार रमोद सिंह मामले को शांत करने के लिए दूसरी तरकीब सोचने लगे. हाजत में कुछ लोग बंद थे, इसी में किसी का कान काटकर मेरे कान की जगह लगा दिया जाए. अगर उस हाजती ने कोई शिकायत की तो बैक डेट में उसका फ़र्ज़ी जन्म प्रमाण पत्र लगाकर कह दिया जाएगा की यह जन्मजात कनबुच्चा था. लेकिन मैंने सीधे-सीधे इंकार कर दिया. मेरा तर्क था की मैं मैथिल हूं, जो कान के कच्चे होते हैं. इसकी क्या गारंटी है की जिस व्यक्ति का कान मुझे प्रत्यारोपित किया जा रहा है, वह कान का कच्चा है भी की नहीं. मैं तो अपने कान से ब्रह्माण्ड के दूसरे छोड़ में हो रही खुरूर पुसुर को भी सुन लेता है. लोग मुझे संवेदना में फोन कर रहे थे, आहाह सबेरे तो आपके कान देखे थे.

मेरे मामले की जांच का जिम्मा कांस्टेबल को दिया गया. मैंने कहा की यह मेरी तौहीन है, डीएसपी से निचे के अफसर मेरे मामले की जांच करें यह मेरी तौहीन होगी. कांस्टेबल ने बोला “सर हम साहेब लोग से बढ़िया जांच कर देंगें बेसवाश रखिये आपका दू जो गया है ना ओरिजिनल के साथ दू जो औरो दिला देंगें. सभी कौवे के पीछे परेशान थे. कांस्टेबल ने सवाल जबाब किया की अंतिम बार कान कब अपनी जगह पर था, कब उसे हिलाया डुलाया था. मैंने कहा की याद नहीं कान हिलाने डुलाने खींचने का काम मेरी धर्मपत्नी करती हैं, जो अभी अपने ससुराल में हैं.

फिर कांस्टेबल जोर से चिल्लाते हुए थानेदार को बोला “ए सअर एइ जअ आइये आ देखिये इनका कनमा जगहे पर है आ चश्मो भी है. चश्मा में शीशवे नै है तो लोकाए गा कैसे. हम बोले थे ना की हम केस को सोल्व कर देंगें. कान पाकर मैं अति प्रसन्न हुआ. फिर चैनल पर ब्रेकिंग चला. लेकिन सबसे अधिक राहत कौवों को पहुंची क्योंकी एसपी ने मीडिया के प्रेसर को देखते हुए थाने को कह दिया था की कौवों को चालान कर जेल भेज दो. कौओं को पीआर बांड भराकर यह हिदायत देते हुए छोड़ दिया गया की वह आगे से आगे कोई चोरी चाकरी नहीं करेंगें. कौवों ने जब ऐसा करने से इंकार कर दिया, तो थाने वालों ने दो डंडा जमा दिया.

थानेदार रमोद सिंह ने कौवों को बोला “रे तुम लोग अथी करते हो एतना केस लादेंगे ना की बेल करवाते करवाते मर जाओगे. हे मुंशी जी उ वाला फाइल निकालिए, जिसमें एक महिला केस की थी की नकबेसर कागा ले भागा. इस केस में इस सबको रिमांड पर लीजिये. हे रे तुम लोग कान, कनबाली सब कुछ चुड़ाता है. कौवों ने मुसीबत से पीछा छुड़ाना उचित समझा. थाने से बाहर कौवों मैं अपने छूटे साथी से जिज्ञासा करनी शुरू कर दी. कौवे रो रो कर अपनी व्यथा बताने लगे मां कसम कान और चश्मा दोनों ही अपनी जगह पर था फिर भी यह लोग हम लोगों को 5 घंटे तक पीटते रहे. अजीब मैथिल आदमी है कान छू कर देखता नहीं है और कौए पर इल्जाम लगाता है. मैं यह सब सपना देख रहा था कि जब एकाएक मेरी नींद खुल गई मैंने सबसे पहले कान पर हाथ डाला तो कान अपनी जगह सही सलामत थी, जान में जान आई वरना सपना इतना भयानक था की पूछिये मत.

लेकिन 1 घंटे बाद कहीं से एक खबर आई कि बहुत सारे मैथिल बंधुओं का कान कौआ ले भागा जिसको लेकर हाहाकार मचा हुआ है और काफी आक्रोश है. मैंने उन लोगों से अपील भी किया कि यह सब अफवाह है, आपका कान आपके जगह सुरक्षित है. लेकिन अगर कौवे के भाग में ख़रजितिया लिखा है तो. आप सभी लोग तसल्ली के लिए अपने कान में GPS लगा लीजिए उसे खोजने में आसानी होगी.

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