Tirhut Diary ( तिरहुत डायरी )

मानो अंग्रेजी अनुवाद नहीं होता तो कालिदास अभी तक किसी पेड़ की डाली पर बैठ कर डाल काट रहे होते

खट्टरकाका की डायरी से
Vijay deo jha

जब कभी कालिदास के अभिज्ञान शाकुंतलम की चर्चा होती है तो भारत के बुद्धिजीवी और साहित्यकार कालिदास के अधिक विलियम जोन्स की तारीफ करते हुए भावुक हो जाते हैं.

फिरंगियों की गुलामी झेल रहे भारत में विलियम जोन्स ने 1789 में अभिज्ञान शाकुंतलम का अनुवाद अंग्रेजी में किया था. यदि विलियम जोन्स ने कालिदास के इस अनुपम कृति का अनुवाद नहीं किया होता तो पश्चिम जगत को कालिदास के अद्वितीय प्रतिभा का योग्यता का पता ही नहीं चलता. मानो की अनुवाद न होता तो कालिदास अभी तक किसी पेड़ की डाली पर बैठ उस डाली को काट रहे होते.
विलियम जोन्स ने अनुवाद विश्व साहित्य को समृद्ध करने के लिए अनुवाद नहीं किया था. वह अनुवाद ब्रिटिश साम्राज्यवाद को नैतिक जस्टिफिकेशन देने के लिए किया गया. एक चक्रवर्ती सम्राट दुष्यंत अपनी विवाहिता पत्नी शकुंतला को भूल जाता है.
पश्चिमी जगत को बताना था कि हिंदुस्तान के लोग स्मृतिलोप के शिकार हैं. उन्हें अपना बीता कल तक याद नहीं रहता तो इतिहास की बात ही छोड़ दीजिए. देखिये इनका चक्रवर्ती सम्राट अपनी पत्नी को भूल जाता है. ऐसे भूमि पर अंग्रेज़ी शासन का होना जायज है.

“व्हॉट्स मैन्स बर्डेन” की थ्योरी देने वाले रुडयार्ड किपलिंग साम्राज्यवाद को बड़े उज्जड़ तरीके से सही ठहराया तो विलियम जोन्स ने इसे कलात्मक और महीन तरीक़े से जस्टिफाई किया. बाद बांकी कालिदास मिथिला के थे या उज्जैन के इस पर बहस हो सकता है.

लेख विजय देव झा के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button