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चाईबासा : डायन के संदेह में महिला की हत्या, आरोपी महिला गिरफ्तार

Chaibasa : समाज में अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हो गयी हैं कि जरा से भूत प्रेत और डायन ओझा का शक होने पर हिंसक वारदात हो जा रहे हैं. इसके पीछे जागरूकता मुख्य वजह है. समझदारी के अभाव में कुछ इसी तरह की घटना जिले के पाताहातु गांव में हुई है.

जहां डायन होने के संदेह में एक महिला ने सुनीता नाम कि महिला की त्रिशूल से मारकर हत्या कर दी. आरोपी 22 वर्षीय महिला सुनीता गोप ने  रिश्ते में मौसी लगने वाली सुनीता गोप की डायन होने के संदेह में हत्या कर दी.

हत्या की जानकारी पुलिस को मिली जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी महिला से पूछताछ की जा रही है. वहीं शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. घटना देर रात की बतायी जा रही है.

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क्या है मामला

आरोपी महिला सुनीता गोप के पैरों में कई दिनों से दर्द था. जिसका वह जड़ी-बूटी से इलाज करा रही थी. इसके साथ ही घर में पूजा और झाड़-फूंक भी चल रहा था. लेकिन फिर भी पैर का दर्द ठीक नहीं हो रहा था.

आरोपी सुनीता गोप को अपनी रिस्ते की मौसी सुनीता गोप पर शक था कि वह डायन है और उसी ने कुछ कर दिया है, जिसकी वजह से उसके पैर का दर्द ठीक नहीं हो रहा है.

इसी शक के आधार पर सुनीता गोप ने अपनी मौसी का हाथ पकड़ा और उसे उस स्थान पर लेकर गयी जहां पूजा हो रही थी. फिर वहां जाकर उसने त्रिशूल निकाला और मौसी पर उससे कई वार किए. जिससे की घटनास्थल पर ही उसकी मौसी की मौत हो गयी.

जादू-टोना, अंधविश्वास और डायन बिसाही के शक में नहीं रुक रही हत्याएं

झारखंड में जादू टोना, अंधविश्वास और डायन बिसाही के शक में हत्या और प्रताड़ना के मामले नहीं थम रहे हैं. पिछले एक वर्ष के दौरान झारखंड में अंधविश्वास और जादू-टोना के शक में 30 लोगों की हत्या कर दी गयी है. यह आंकड़े पुलिस के हैं. जबकि स्थिति इससे ज्यादा खराब है.

कई ऐसे मामले हैं जो पुलिस तक पहुंचते ही नहीं हैं 1990 से 2000 तक झारखंड के कई इलाकों में डायन के नाम पर 522 महिलाओं की निर्मम हत्या की गई थी. लेकिन झारखंड अलग राज्य बनने का बाद डायन के नाम पर होने वाली हत्याओं की संख्या में काफी इजाफा हो गया.

2000 से लेकर 2019 के ताजा आंकड़ो के अनुसार अबतक 1800 महिलाएं मार दी गई हैं. जिसमें सबसे अधिक आंकड़ा चाईबासा और सरायकेला का है. जहां कुल 233 महिलाओं की हत्या कर दी गयी.

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अलग राज्य बनने के बाद हुई 1800 महिलाओं की हत्या

झारखंड गठन के बाद से अब तक डायन बिसाही के आरोप में 1800 महिलाओं की हत्या की जा चुकी है. राज्य के लिए ये कलंक है. पर, इस मुद्दे पर समाज अभी तक जागरूक नहीं हो सका है. इस गंभीर समस्या के निराकरण के लिए कई लोग और कई संस्थाएं लड़ाई लड़ रही हैं.

पर, ये कुप्रथा गांवों में इस तरह से फैली हुई है कि लोग इससे बाहर ही नहीं निकल पा रहे. तमाम तरह की योजनाओं और कई संस्थाओं के द्वारा काम किए जाने के बावजूद भी इस कुप्रथा को लोगों के दिमाग से नहीं निकाला जा सका है.

अधिनियम बनने के बाद भी घटनाओं में कमी नहीं

डायन के नाम पर औरतों के साथ जुल्म करने वाले लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि वे ऐसा करके इस सामाजिक बीमारी को और बढ़ावा ही दे रहे हैं. डायन बताकर महिलाओं को मारने और उसके परिवार को प्रताड़ित करने की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है.

हद तो तब हो जाती है, जब डायन बताकर महिला को मल-मूत्र पिलाया जाता है, निर्वस्त्र कर उसका सामूहिक दुष्कर्म किया जाता है. सर मुंडवाकर मुंह काला कर गांव में घूमाया जाता है. कई बार तो गांव से निकाल भी दिया जाता है. इस सामाजिक कुरीति को खत्म करने के लिए राज्य में डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 बना. इसके बावजूद ऐसी घटनाओं में कमी नहीं आ रही है.

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डायन बताकर किया जाता अमानवीय अत्याचार

हालांकि झारखंड में डायन बताकर औरतों की पर अत्याचार और उनकी हत्या के मामले कम नहीं है. इसपर रोक लगने की जगह अक्सर इस तरह के मामले देखने को मिलते हैं. महिलाएं डायन के आरोप में अमानवीय अत्याचार की शिकार होती हैं.

डायन होने का आरोप  लगाकर औरतों को मल-मूत्र पिलाने, नंगा कर गांवों में घुमाने और उनके साथ सामूहिक बलात्कार करने जैसी खबरें झारखंड में आये दिन सुनने को मिलती है.

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