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खुद प्यासी है पानी टंकी, इंजीनियर ने रिपोर्ट दी-पांच गांवों में हो रही जलापूर्ति, मंत्री बोले-मामले की जांच होगी

Ranchi: बोकारो में बड़कीपुन्नू ग्रामीण जलापूर्ति योजना अब तक अधूरी पड़ी है. हालांकि तेनुघाट के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के इंजीनियर के अनुसार योजना का लाभ 5 राजस्व गांव को मिलने भी लगा है. 2 पंचायत के 5 गांवों के 80% लोगों के घर तक जलापूर्ति होने लगी है.

गोमिया के पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद ने इंजीनियर की रिपोर्ट पर सवाल उठाये हैं. सीएम हेमंत सोरेन और मंत्री मिथिलेश ठाकुर को लेटर लिखकर इस मामले की जांच करने को कहा है.


योगेंद्र के मुताबिक बड़कीपुन्नू ग्रामीण जलापूर्ति योजना अब तक अधूरी है. योजना अबतक चालू नहीं होने से ग्रामीणों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने अब इस मामले में जांच कमिटी का गठन कर रिपोर्ट मंगाने की बात कही है.

इंजीनियर की ठेकेदार से सांठगांठ

योगेंद्र प्रसाद के अनुसार बड़कीपुन्नू ग्रामीण जलापूर्ति योजना अब तक अधूरी है. इस संबंध में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, धनबाद (पेयजल एवं स्वच्छता अंचल) ने पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, तेनुघाट से प्रतिवेदन मांगा था. तेनुघाट के कार्यपालक अभियंता ने इस मामले में ठेकेदार से सांठगांठ कर ली. बिना फिल्ड विजिट किये उसने रिपोर्ट (पत्रांक 1682, दिनांक-23-11-20) बनायी कि योजना से 5 गांवों के लोगों को लाभ मिल रहा है. 70 फीसदी टोलों में पानी की सप्लाई की जा रही है.

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वास्तव में बड़कीपुन्नू, छोटकीपुन्नू, महुआटांड़, गांगपुर जैसे किसी भी गांव के किसी भी टोले में पानी सप्लाई की ही नहीं जा रही है. कागज पर सप्लाई जारी है. इसके बावजूद कॉन्ट्रैक्टर को एग्रीमेंट कॉस्ट के 86 फीसदी राशि का भुगतान कर दिया गया है. कागजी रिकॉर्ड से योजना 3 साल पहले पूरी हो गयी है पर अब तक जलापूर्ति शुरू नहीं की जा सकी है. पानी टंकी की क्वालिटी भी खराब है और अभी से यह क्षतिग्रस्त होने लगा है. इससे विभाग और ठेकेदार पर सवाल उठते हैं. दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो.

3 सालों में भी नहीं शुरू हो सकी बड़कीपुन्नू ग्रामीण जलापूर्ति

बड़कीपुन्नू ग्रामीण जलापूर्ति योजना का शिलान्यास 2016 में किया गया था. तत्कालीन पेयजल मंत्री सी पी चौधरी ने 3 सालों के भीतर योजना को धरातल पर उतारे जाने का भरोसा विधानसभा में दिया था. योगेंद्र प्रसाद के मुताबिक दो पंचायतों की 5000 आबादी को इसका लाभ मिलना है. विधानसभा में कई बार चर्चा के बावजूद 2018 तक इसे शुरू नहीं कराया जा सका.
यहां तक कि 2020 बीतने को है पर योजना अधर में ही है. लगभग साढे 12 करोड़ की योजना कायदे से 2018 तक जमीन पर नहीं उतारी जा सकी. अब भी इससे कई गांवों में पानी कनेक्शन नहीं पहुंचा है. कागजों पर ही पानी सप्लाई हो रहा है. इस संबंध में सरकार को जांच के लिये लिखा गया है.

बनेगी जांच कमिटी

मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने योगेंद्र प्रसाद की शिकायत पर संज्ञान लिया है. कहा है कि इस संबंध में जल्दी ही जांच कमिटी बनायी जायेगी. इसी आधार पर आगे एक्शन लिया जायेगा. फिलहाल इस संबंध में विभाग को लेटर भेजा गया है और इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मंगायी जा रही है.

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