
Ranchi: सशक्तिकरण का मार्ग विषय पर एक राज्यस्तरीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि महिलाएं सशक्त होंगी तो समाज और देश भी सशक्त होगा. महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए हर क्षेत्र में 30 फीसदी आरक्षण देने की जरूरत है.आदिवासी बहुल झारखंड में महिलाओं को संपत्ति का मालिकाना अधिकार भी देना होगा. यहां प्रचलित कस्टमरी लॉ के साथ अन्य बातों पर भी गौर करना होगा. राज्यस्तरीय सम्मेलन का आयोजन न्यायिक अकादमी, धुर्वा में शनिवार को किया गया.
संपत्ति का अधिकार एक महत्वपूर्ण उपकरण
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने राष्ट्र की प्रगति के लिए महिलाओं के संपत्ति के अधिकार पर चर्चा के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में महिलाओं के सशक्तिकरण को सुरक्षित करने के लिए संपत्ति का अधिकार एक महत्वपूर्ण उपकरण है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी धर्मों के पर्सनल लॉ सहित अन्य कानूनों की व्याख्या करते हुए महिलाओं के संपत्ति के अधिकार समेत अन्य अधिकार दिए हैं, लेकिन महिलाओं को आज भी संपत्ति में बराबरी का हक नहीं मिलता. जब तक महिलाओं को संपत्ति में अधिकार नहीं मिलेगा वह आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होंगी. मौके पर झारखंड हाइकोर्ट के सीनियर जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने कहा कि दुनिया के 180 देशों में से लगभग 164 देश महिलाओं की संपत्ति के अधिकारों को मान्यता देते हैं, लेकिन केवल 52 देश ही वास्तव में उनके अधिकारों की गारंटी दे पाए हैं. महिलाएं अपने अधिकारों के बारे में जागरूक रहे, यह सुनिश्चित करना जरूरी है. हम में से प्रत्येक को संवेदनशील बनने और जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है. हाईकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने स्वागत भाषण किया. जबकि जस्टिस एस चंद्रशेखर ने परिचयात्मक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने वैश्विक और भारतीय इतिहास में महिलाओं की अग्रणी भूमिका के बारे में बताया.
इसे भी पढ़ें: IND v SA 2nd ODI: सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रांची मेन रोड में धारा 144 लागू




