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मनरेगा में घोटाला करने वाले को बचा रहा चतरा प्रशासन, कार्रवाई के नाम पर हो रही है खानापूर्ति

Pravin Kumar

Ranchi: मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में जहां 2018 में झारखंड को भारत सरकार से उत्कृष्ट कार्य के लिए कुल आठ पुरस्कार मिले थे. वहीं मनरेगा योजना के संचालन में देश स्तर पर चतरा जिला को प्रथम स्थान मिला था. लेकिन 2020 में चतरा में मनरेगा योजना में घोटाला करने वाले कर्मियों को जिला प्रशासन बचाने का काम कर रहा है.

घोटाले में शामिल कर्मियों को विभागीय आदेश के बाद भी नहीं हटाया गया. बल्कि विभाग की तरफ से भेजे गए पत्र को भी जिले में दबा दिया गया. दोषी संविदा कर्मी को भी बचाने में जिला प्रशासन और चतरा डीडीसी मुरली मनोहर प्रसाद लगे हुए हैं.

ज्ञात हो कि मनरेगा योजना में गड़बड़ी के मामले में कमीशनखोरी एवं अन्य अनियमितता संबंधित प्रतापपुर प्रखंड का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसके बाद चतरा उपायुक्त जितेंद्र कुमार सिंह ने प्रशासनिक स्तर पर गहन जांच के आदेश दिये.

साथ ही टीम गठित की है. जांच रिपोर्ट 15 मई तक जमा करने का आदेश भी दिया गया है. लेकिन प्राप्त सूचना के अनुसार, जांच रिपोर्ट जिला नहीं पहुंची है.

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जांच के बाद विभाग ने दिए ये निर्देश

विभागीय जांच के बाद मनरेगा योजना की राशि गबन करने के आरोप में संबंधित मुखिया, पंचायत, ग्राम रोजगार सेवक, कनीय अभियंता, प्रतापपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड नाजिर एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी से 12 प्रतिशत ब्याज सहित राशि की वसूली जाए.

साथ ही विभागीय आदेश में यह भी कहा गया कि संबंधित सभी संविदा कर्मियों की संविदा समाप्त कर दी जाये. जिसमें परियोजना पदाधिकारी फनींद्र गुप्ता भी शामिल हैं. हाल के दिनों में चतरा जिला के प्रतापपुर प्रखंड के एक मुखिया और लाभुक के बीच बातचीत का ऑडियो सामने आया था. जिसमें सुना जा सकता है कि प्रखंड से लेकर जिला तक योजना राशि का 30 प्रतिशत पहुंचाना होता है.
मनरेगा में घोटला करने वाले पर कार्यवाई का विभागीय पत्र को जिला ने दबा दिया.

गुम हो गई मनरेगा की 40 सड़कें– संबंधी खबर न्यूजविंग ने गत अक्टूबर में प्रकाशित की थी. इसके बाद संविदा कर्मी को हटाने एवं डीडीसी को किये गये शो-कॉज की खबर भी प्रकाशित की थी.

लेकिन इस पूरे मामले को जिला स्तर पर दबा देने का खेल चल रहा है. 6 मई 2020 को ग्रामीण विकास विभाग के विशेष सचिव रवि रंजन ने चतरा उपायुक्त जितेंद्र कुमार सिंह को कार्रवाई करने संबंधी आदेश निर्गत किये. लेकिन इसे भी दबा दिया गया.

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क्या था पूरा मामला

गुम हो गई मनरेगा की 40 सड़कें – खबर संबंधी मामले पर चतरा जिला के प्रतापपुर प्रखंड की प्रतापपुर पंचायत में 15 मिट्टी मोरम सड़क निर्माण योजनाओं की जांच का आदेश हुआ. मुख्यालय स्तर पर जांच दल बना. जांच दल द्वारा समर्पित प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग द्वारा की गई.

समीक्षा उपरांत विभाग ने 15 मिट्टी मोरम सड़क निर्माण में कुल 14 ही सड़कें पायी, एक सड़क गायब रहीं. बाद में व्यापक पैमाने पर मनरेगा योजना में गड़बड़ी का मामला सामने आया. इसके बाद विभागीय आदेश जारी किए गए. जिसमें विभागीय आदेश संख्या (दिनांक 7- 2017) के अनुसार, सभी योजनाओं में 12 प्रतिशत ब्याज सहित राशि की वसूली के आदेश हुआ.

इस आशय का पत्र मुखिया, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सेवक, कनीय अभियंता, प्रखंड विकास पदाधिकारी को भेजा गया. संबंधित सभी संविदा कर्मियों को बर्खास्त करने का आदेश हुआ. इसमें परियोजना पदाधिकारी फनींद्र गुप्ता भी शामिल हैं. साथ ही संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी सहित सरकारी कर्मी के विरुद्ध प्रपत्र गठित करने की बात कही गई थी.

ग्रामीण विकास विभाग के विशेष सचिव के द्वारा निर्गत आदेश में सभी 6 बिंदुओ का अनुपालन करने को कहा गया, लेकिन इस पूरे मामले को चतरा जिला प्रशासन ने दबा दिया.

जब चतरा उपायुक्त से पत्र के संबंध में और कार्रवाई के बारे में पूछा गया. तो उन्होंने 6 मई को विभाग द्वारा प्रेषित पत्र 18 मई को मिलने की कही. जबकि विभाग के द्वारा 19 मई को तीसरा पत्र रिमाइंडर मेल से भेजा गया. ऐसे में उपायुक्त चतरा को भेजे गये पत्र को अखिर कौन दबा रहा यह बड़ा सवाल है.

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