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#Chandrayaan2: कैसे हुई थी विक्रम लैंडर की लैंडिंग, नासा ने तस्वीरें जारी कर बताया

Washington: भारत के महत्वकांक्षी मिशन चंद्रयान 2 के विक्रम लैंडर की लैडिंग कैसे हुई थी, इसकी जानकारी नासा ने तस्वीरें जारी की है. चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के विक्रम लैंडर (Vikram Lander) को लेकर नासा (NASA) ने एक बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि लैंडर की हार्ड लैंडिंग हुई थी.

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अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने ‘लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर कैमरा’ से ली गईं उस क्षेत्र की ‘हाई रेजोल्यूशन’ तस्वीरें शुक्रवार को जारी कीं. जहां भारत ने चंद्रयान 2 मिशन के तहत लैंडर विक्रम की ‘सॉफ्ट लैंडिग’ कराने की कोशिश की थी. नासा ने इन तस्वीरों के आधार पर बताया कि विक्रम लैंडर की ‘हार्ड लैंडिंग’ हुई.

विक्रम की हुई हार्ड लैंडिंग

नासा के लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर (एलआरओ) अंतरिक्षयान ने 17 सितंबर को चंद्रमा के अनछुए दक्षिणी ध्रुव के पास से गुजरने के दौरान उस जगह की कई तस्वीरें ली, जहां विक्रम ने सॉफ्ट लैंडिग के जरिए उतरने का प्रयास किया था. लेकिन एलआरओसी की टीम लैंडर के स्थान या उसकी तस्वीर का पता नहीं लगा पाई है.

चांद पर विक्रम के सटीक स्थान की खोज जारी

नासा ने कहा कि विक्रम की हार्ड लैंडिंग हुई और अंतरिक्ष यान के सटीक स्थान का पता अभी तक नहीं चला है. नासा ने बताया कि इस दृश्यों की तस्वीरें लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर कैमरा क्विकमैप ने लक्षित स्थल से ऊपर उड़ान भरने के दौरान ली.

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‘गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर’ के एलआरओ मिशन के डिप्टी प्रोजेक्ट साइंटिस्ट जॉन कैलर ने एक बयान में कहा कि एलआरओ 14 अक्टूबर को दोबारा उस समय संबंधित स्थल के ऊपर से उड़ान भरेगा, जब वहां रोशनी बेहतर होगी.

नासा ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट किया, ‘चांद की सतह पर विक्रम लैंडर की हार्ड लैंडिंग हुई, यह स्पष्ट है. स्पेसक्राफ्ट किस लोकेशन पर लैंड हुआ, यह फिलहाल निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता. तस्वीरें केंद्र से 150 किलोमीटर दूरी से ली गई हैं. अक्टूबर में  लूनर रिकॉनिस्सेंस ऑर्बिटर दोबारा प्रयास करेगा. ‘

गौरतलब है कि चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने का भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की कोशिश नाकाम रही थी और विक्रम लैंडर का लैंडिंग से चंद मिनटों पहले जमीनी केंद्रों से संपर्क टूट गया था.

इधर, ISRO के चेयरमैन डॉ. के. सिवन ने चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर बेहतरीन काम करने की बात कही है. उसके सारे पेलोड (यंत्र) सही तरीके से काम कर रहे हैं. ऑर्बिटर ने चांद की सतह को लेकर प्रयोग करने शुरू कर दिए हैं.

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