
जून में ही मुख्यमंत्री ने केंद्रीय राज्य ऊर्जा मंत्री को असहमति जताते हुए लिखा था पत्र
Chhaya
Ranchi : डीवीसी के बकाया भुगतान में केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया है. राज्य सरकार को बकाया भुगतान के लिए 15 दिन का समय दिया गया. इसके बाद केंद्रीय ऊर्जा सचिव की उपस्थिति में राज्य के मुख्य सचिव और ऊर्जा सचिव की बैठक हुई. बैठक उच्चस्तरीय रही. सूत्रों की मानें तो इस बैठक में बिजली संशोधन अधिनियम पर चर्चा की गयी. जिसे लागू करने पर पहले ही मुख्यमंत्री ने असहमति जतायी है.
बैठक मुख्य रूप से डीवीसी के बकाया भुगतान के लिए बुलायी गयी थी. लेकिन इस बैठक में डीवीसी के अधिकारी ही शामिल नहीं हुए और न ही इस बैठक का फलाफल अधिकारियों को बताया गया. जानकारी है कि केंद्र का डीवीसी के बकाया भुगतान में हस्तक्षेप करना और पंद्रह दिनों का समय देना, राज्य सरकार पर दबाव बनाने जैसा है. पहले ही राज्य सरकार ने राजस्व की कमी होने पर श्वेत पत्र जारी कर दिया है. वहीं कोरोना महामारी के बाद स्थिति बदहाल है.
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सीएम ने लिखा था असहमति जताते हुए पत्र
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा राज्यमंत्री राजकुमार सिंह बिजली संशोधन अधिनियम 2020 पर असहमति जताते हुए पत्र लिखा था. पत्र जून के आखिरी महीने में लिखा गया. जिसमें राज्य विद्युत नियामक आयोग को कमजोर करने की बात की गयी है. साथ ही डीबीटी के जरिये सब्सिडी, नेशनल टैरिफ पॉलिसी, रिन्यूएबल पर्चेस ऑब्लिगेशन समेत कई प्रावधानों पर आपत्ति जतायी गयी थी.
इसके पांच दिन बाद तीन जुलाई को मुख्यमंत्री ने ऊर्जा राज्य मंत्री राजकुमार सिंह के बैठक में भी इन बातों को दुहराया. बैठक वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिये की गयी. इस बैठक और पत्र में स्पष्ट रूप से मुख्यमंत्री ने बिल स्वीकार्य नहीं होने की बात की थी.
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राज्यों से मांगी गयी थी सहमति
केंद्र सरकार की ओर से बिजली संशोधन अधिनियम का प्रस्ताव 17 अप्रैल को लागू किया गया. जिसमें विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों में बदलाव की बात की गयी है. इसके साथ ही राज्य सरकारों को इस पर सुझाव देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था. कोरोना लॉकडाउन को देखते हुए बाद में पांच जून तक समय बढ़ाया गया. अब तक 12 राज्यों ने इस पर असहमति जतायी है. जिसमें से एक झारखंड है. हालांकि बिजली बोर्ड के चारों निगमों ने बिल पर सहमति जताया था.
5608.32 रुपये बकाया
राज्य सरकार के पास डीवीसी का 5608.32 करोड़ रुपये बकाया है. मामला फरवरी से चल रहा है. जिसमें अब केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया है. जून महीने में डीवीसी ने जेबीवीएनएल और ऊर्जा विभाग को बकाया भुगतान के लिए पत्र लिखा था. जिसके बाद जेबीवीएनएल ने 5600 करोड़ लोन लेने की योजना बनायी. हालांकि वित्त विभाग की ओर से वर्तमान में 1800 करोड़ रुपये लोन लेने पर सहमति मिली है.
यह लोन आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत ली जायेगी. केंद्र सरकार की ओर से भी जेबीवीएनएल को बिजली उत्पादकों के भुगतान के लिए 90 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया. बता दें कोरोना लॉकडाउन के बाद जून से ही डीवीसी जेबीवीएनएल को लगातार बकाया भुगतान के लिए नोटिस दे रहा है. वहीं राजस्व की कमी के कारण जेबीवीएनएल भुगतान करने में असमर्थ रहा.
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