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भारतमाला प्रोजेक्ट के लिए रामगढ़ के 17 गांवों में 94 हेक्टेयर जमीन लेगा केंद्र, जानें किन किन गांवों को किया गया है शामिल

-अधिकांश जमीन कृषि योग्य भूमि

Ranchi: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना भारतमाला का लाभ झारखंड को भी मिलना है. इसके तहत तय रूट पर चार लेन की सड़क बनायी जानी है. इसके लिए जरूरत के मुताबिक जमीन का अधिग्रहण भी किया जायेगा. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इसके लिए रामगढ़ में कई गांवों में जमीन अधिगृहित करने की तैयारी में है. जैना मोड़-गोला-ओरमांझी सेक्शन पर वह 15 गांवों में जमीन लेगा, जिसमें अधिकांश जमीन का नेचर कृषि योग्य भूमि का है. जिनकी जमीन ली जानी है, वे अपनी आपत्ति, शिकायत दर्ज कराना चाहें तो तीन सप्ताह के अंदर (मई के पहले सप्ताह तक) जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के पास संपर्क कर सकते हैं.

किन-किन गांवों में ली जा रही जमीन

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक रामगढ़ में एन.एच 320बी के किमी 55.650 से 71.323 (गोला-ओरमांझी सेक्शन) तक के लिए जमीन अर्जित की जानी है. मंत्रालय के डायरेक्टर राजेश गुप्ता ने विज्ञापन जारी करते हुए बताया है कि रामगढ़ में 232.8882 एकड़ (94.2486 हेक्टेयर) जमीन की जरूरत है.

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इसमें दुलमी तालुक से बेयांग गाँव (कुल 120 परिवार/पक्ष), बोंगई गाँव (कुल 2 परिवार/पक्ष), कुल्ही गाँव (कुल 85 परिवार/पक्ष), पांचा गाँव (कुल 12 परिवार/पक्ष), पोटमदगा गाँव (कुल 64 परिवार/पक्ष) शामिल हैं. इसी तरह से तालुक गोला से 12 गांवों को शामिल किया गया है. गोला से बड़कीकईया (कुल 24 परिवार/पक्ष), बरडीहा (कुल परिवार/पक्ष 80), बरियातु (कुल परिवार/पक्ष 201), बारूघुटु (कुल

परिवार/पक्ष 9), छोटकीकोईया (कुल परिवार/पक्ष 2), डभातु (कुल परिवार/पक्ष 26), कमता (कुल परिवार/पक्ष 2), कमती (कुल परिवार/पक्ष 88), नावाडीह (कुल परिवार/पक्ष 27), रायपुरा (कुल परिवार/पक्ष 21), रोला उर्फ गोला (कुल परिवार/पक्ष 55) और सोटई (कुल परिवार/पक्ष 48) इस लिस्ट में शामिल हैं. अर्जित की जाने वाली जमीन में से 90 फीसदी से अधिक जमीन की प्रकृति कृषि योग्य वाली है. इसके अलावा कुछ जमीन गैर मजरूआ, होटल, मकान, रेस्टोरेंट मकान, जंगल वगैरह का है.

बनना है दो या एक्सप्रेस-वे

झारखंड में दो नये एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराया जाना है. केंद्र सरकार ने भारत माला प्रोजेक्ट के तहत इन दोनों योजनाओं का चयन किया है. दोनों सड़कें ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के रूप में तैयार होनी है. इसके तहत 4 लेन सड़कें बनायी जानी है जो खेतों-खलिहानों से गुजरेंगी. इस सड़क में कम से कम घुमावदार मोड़ रखे जायेंगे. संबलपुर से रांची तक की ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट की लंबाई 146 किलोमीटर से अधिक होगी. इसकी भौतिक रूप से जांच करा ली गयी है. इसके अलावा भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर से गुमला-रांची होते हुए धनबाद तक सड़क बननी है.

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योजना के अंतर्गत ओरमांझी (रांची) से गोला (रामगढ़) होते हुए बोकारो तक की सड़क योजना को ग्रीन फील्ड में शामिल किया जा रहा है. मतलब यह कि इस रूट पर सड़क पूरी तरह से नयी बनेगी. इस दिशा में एनएचएआई आगे बढ़ चुका है. एनएच-33 पर ओरमांझी से सिकिदिरी होते हुए गोला तक निकाला जायेगा. फिर गोला से बोकारो तक सड़क बनेगी. प्रयास यह हो रहा है कि नया एक्सप्रेस-वे बेहतर बने तथा यह मौजूदा सड़क का यह बढ़िया विकल्प हो.

क्या है ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट

ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट के तहत खेत-खलिहान से होकर सीधी सड़क बनायी जानी है. रिजर्व फॉरेस्ट आदि को छोड़कर सड़क बनेगी. इसके लिए ज्यादातर सरकारी भूमि या कृषि भूमि की जरूरत पडेगी. ऐसे में माना जाता है कि जमीन अधिग्रहण में ज्यादा परेशानी नहीं होती. अतिक्रमण या संरचना हटाने की नौबत कम ही आती है. कृषि भूमि होने के कारण मुआवजा राशि भी बहुत ज्यादा नहीं खर्च नहीं करनी पड़ती है.

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