
Lucknow/Mumbai: देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध पर बसपा प्रमुख मायावती ने मोदी सरकार को घेरा है. साथ ही नागरिकता संशोधन विधेयक का एकबार फिर से विरोध किया है.
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने शुक्रवार को नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करते हुये कहा कि इस विधयेक को पारित कराने में केन्द्र ने जितनी जल्दबाजी दिखाई है यदि उतनी ही जल्दबाजी इन्होंने देश में महिला उत्पीड़न, दुष्कर्म-हत्या आदि पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानून बनाने में दिखाई होती तो बेहतर होता.
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महिला उत्पीड़न के खिलाफ कानून बनाने में दिखायी होती जल्दबाजी- बसपा
मायावती ने लगातार तीन ट्वीट किये. पहले में उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि विदित है बीएसपी (बसपा) ने नागरिकता संशोधन विधेयक का संसद के दोनों सदन में जबर्दस्त विरोध किया और उसके इसके विरुद्ध वोट भी दिया.’
1. जैसाकि विदित है कि बी.एस.पी. ने नागरिकता संशोधन बिल का संसद के दोनों सदन में जबर्दस्त विरोध किया व इसके विरुद्ध वोट भी दिया।
— Mayawati (@Mayawati) December 13, 2019
दूसरे में उन्होंने लिखा है, ‘‘इस विधयेक को पारित कराने में केन्द्र ने जितनी जल्दबाजी दिखाई है यदि उतनी ही जल्दबाजी इन्होंने देश में महिला उत्पीड़न, बलात्कार-हत्या आदि पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानून बनाने में दिखाई होती तो बेहतर होता.’’
2. और इस बिल को पास कराने हेतु केन्द्र ने जितनी जल्दबाजी दिखाई है यदि उतनी ही इनको देश में महिला उत्पीड़न व रेप-मर्डर आदि पर अंकुश लगाने हेतु सख्त कानून बनाने पर भी दिखाई होती, तो यह बेहतर होता।
— Mayawati (@Mayawati) December 13, 2019
बसपा नेता ने अपने तीसरे ट्वीट में कहा, ‘‘इस सम्बन्ध में राज्यों को केवल पत्र लिखने की खानापूर्ति करने से इसका कोई सार्थक हल निकलने वाला नहीं है.’
3. जबकि इस सम्बन्ध में राज्यों को केवल पत्र लिखने की खानापूर्ति करने से इसका कोई सार्थक हल निकलने वाला नहीं है।
— Mayawati (@Mayawati) December 13, 2019
पूर्वोत्तर राज्यों में हो रहे हिंसा पर शिवसेना ने उठाये सवाल
नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध जारी है. वहीं बीजेपी की पुरानी सहयोगी शिवसेना ने एकबार फिर आंखे तरेरी हैं. शिवसेना ने शुक्रवार को केंद्र को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि नया नागरिकता कानून लाकर वह यह दिखाना चाहती है कि वह हिंदुओं की इकलौती तारणहार है.
उसने कहा कि केंद्र के इस कदम से पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा चालू हो गई है, ऐसा दर्द देकर वह किस तरह की राजनीति करना चाहती है.
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शिवसेना ने आरोप लगाया कि यह विधेयक केवल इसलिए लाया गया ताकि वह (केंद्र सरकार) साबित कर सके कि दुनियाभर में हिंदुओं के रक्षक केवल वे ही हैं.
लेकिन सरकार के पास इसका कोई ठोस जवाब नहीं है कि अनुच्छेद 370 के लगभग सभी प्रावधानों को खत्म करने के बावजूद कश्मीरी पंडित कश्मीर क्यों नहीं लौट सके हैं. वहां हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं.
पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा, ‘‘पूर्वोत्तर के कई राज्यों में कोहराम मचा हुआ है, हिंसा ऊफान पर है. यह दर्द मोल लेकर सरकार कैसी राजनीति कर रही है.’’
गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे नीत दल ने विधेयक का लोकसभा में तो समर्थन किया था लेकिन राज्यसभा में मतदान ही नहीं किया.
राज्यसभा में विधेयक पर मतदान के दौरान शिवसेना के सांसदों ने वॉकआउट किया था, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूछा था कि विधेयक को लेकर पार्टी का रुख रातोंरात कैसे बदल गया.
उल्लेखनीय है कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक (कैब) को लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद बृहस्पतिवार रात को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी मंजूरी दे दी थी. इसके साथ ही विधेयक कानून में तब्दील हो गया है.
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