
New Delhi: भारत में मंदी की आहट के बीच विदेशी निवेशकों का भरोसा भी टूटता नजर आ रहा है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) ने अगस्त महीने में भारतीय पूंजी बाजारों से 5,920 करोड़ रुपये की निकासी की है.
हालांकि सरकार ने पिछले सप्ताह एफपीआइ पर लगाए गए बढ़े हुए सरचार्ज को वापस लेने की घोषणा कर दी है.
मॉर्निंगस्टार के वरिष्ठ विश्लेषक प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अगस्त में पूंजी बाजारों (शेयर और ऋण) से निकासी उम्मीदों के अनुकूल नहीं है, क्योंकि सरकार पिछले हफ्ते ही विदेशी और घरेलू निवेशकों पर बजट में अमीर लोगों पर सरचार्ज बढ़ाने का फैसला वापस लेने का ऐलान कर चुकी है.
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अगस्त में 5,920 करोड़ रुपये की निकासी
डिपॉजिटरी के ताजा आंकड़ों के अनुसार एक से 30 अगस्त के दौरान एफपीआइ ने शेयरों से शुद्ध रूप से 17,592.28 करोड़ रुपये की निकासी की.
इस दौरान उन्होंने शुद्ध रूप से ऋण या बांड बाजार में 11,672.26 करोड़ रुपये डाले. इस तरह उनकी कुल निकासी 5,920.02 करोड़ रुपये रही. जुलाई में विदेशी निवेशकों ने पूंजी बाजार से शुद्ध रूप से 2,985.88 करोड़ रुपये निकाले थे.
इससे पहले एफपीआइ ने भारतीय पूंजी बाजारों में जून में शुद्ध रूप से 10,384.54 करोड़ रुपये, मई में 9,031.15 करोड़ रुपये, अप्रैल में 16,093 करोड़ रुपये, मार्च में 45,981 करोड़ रुपये और फरवरी में 11,182 करोड़ रुपये का निवेश किया था.
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सीनियर एनालिस्ट मैनेजर रिसर्च श्रीवास्तव ने कहा, ‘घरेलू अर्थव्यवस्था में मंदी की दस्तक, ग्लोबल मार्केट में उठापटक और अमेरिका व चीन के बीच ट्रेड वॉर की वजह से वैश्विक मंदी की आशंकाए सरचार्ज हटाने के बाद बने सकारात्मक माहौल पर भारी पड़ी हैं.’
वहीं, जियोजिट फाइनेंशियल सर्विसेज के एमडी सीजे जॉर्ज ने कहा, ‘विकास की रफ्तार, कॉर्पोरेट की कमाई आदि को लेकर बाजार में थोड़ी नकारात्मकता है. इसके अलावा, नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस भी समस्याओं में घिरे हुए हैं. घरेलू और विदेशी इनवेस्टर दोनों ही अर्थव्यवस्था की मूलभूत दिक्कतों को लेकर चिंतित है. मुझे लगता है कि सरकार की कोशिशों का तबतक मनमुताबिक असर नहीं पड़ेगा, जब तक ओवरऑल सेंटिमेंट सकारात्मक न हो.’
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