
Ranchi: राज्य सरकार ने बोकारो के जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के परियोजना पदाधिकारी माणीक चंद्र प्रजापति पर लगे गंभीर आरोपों की जांच का आदेश दिया है. इस संबंध में ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव ने उप विकास आयुक्त रामगढ़ और बोकारो को निर्देश दिया है. माणीक चंद्र प्रजापति के उपर रामगढ़ डीआरडीए,बोकारो डीआरडीए में परियोजना पदाधिकारी के पद पर रहते हुए कई आरोप लगे. हजारीबाग के मदिनंदन महतो के परिवाद पर विभाग ने उचित तरीके से जांच कर पूरी रिपोर्ट देने को कहा है. प्रजापति अभी बोकारो में पदस्थापित हैं.
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इन आरोपों की होगी जांच
इनके उपर रामगढ़ जिले में सातवें वेतनमान के अनुरूप चिकित्सा भत्ता लिया गया है,जबकि ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी आवंटन आदेश में यह स्पष्ट है कि डीआरडीए कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ देय नही है.
माणीक प्रजापति को किसी काम की जानकारी का अभाव होने एवं झूठ बोलने के कारण डीडीसी रामगढ़ द्वारा इनका स्थानांतरण प्रखंड समन्वयक के पद पर कर दिया गया था,ताकि ये कुछ काम सीख सकें.
माणीक प्रजापति द्वारा रामगढ़ जिले में गलत तरीके से इपीएफ की कटौती करायी गयी है, जो घोर वित्तीय अनियमितता का परिचायक है.
प्रजापति द्वारा परियोजना पदाधिकारी डीआरडीए बोकारो के पद पर पदस्थापन के दौरान मनरेगा योजना के तहत अपने रिश्तेदार( गोमिया प्रखंड के होसिर वेस्ट में एक कुंआ एवं एक डोभा का निर्माण कराया गया है) को लाभ दिया गया है.
प्रजापति द्वारा बोकारो जिले में रूर्बन मिशन के तहत मेसर्स ज्ञानदीप मनरेगा लाभुक रिश्तेदार को हेराफरी कराकर एल.1 करते हुए 50 लाख से अधिक की टेंडर स्वीकृति दी गयी है, जिसमें मेसर्स ज्ञानदीप द्वारा घटिया सामग्रीका आपूर्ति करते हुए आदेशित स्थान पर अघिष्ठापन किया गया है.
प्रजापति द्वारा क्षेत्र भ्रमण के दौरान यह कहा जाता है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है,क्योंकि उनके रिश्तेदार देवनारायण प्रजापति भारतीय जनता पार्टी के बहुत बड़े नेता हैं जिस कारण उपविकास आयुक्त एवं निदेशक सिर्फ उनका कहा मानते हैं.
मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप निराधार: माणीक चंद्र प्रजापति
डीआरडीए के परियोजना पदाधिकारी माणीक चंद्र प्रजापति ने इस संबंध में कहा कि मेरे ऊपर लगाए सभी आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं. सभी आरोप दुर्भावना और बदनाम करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं. उन्होेंने कहा कि किसी भी कार्य में परियोजना पदाधिकारी की भूमिका नहीं होती है. सभी योजनाएं ग्राम सभा से पारित होती है. जहां तक सातवें वेतनमान व अन्य लाभ लेने का आरोप है ,वह प्रावधान के अनुसार ही लिया गया है.इसके लिए सरकारी आदेश प्राप्त है.




