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कंबल घोटालाः जांच में घपले की पुष्टि, सरकार ने नहीं की कोई कार्रवाई, चुप्पी साधे रहे रघुवर दास

Akshay Kumar Jha

Ranchi: 2018 के शुरुआती साल में झारक्राफ्ट में 18 करोड़ के कंबल घोटाले का पर्दाफाश न्यूज विंग ने किया था. बात मीडिया में आ जाने के बाद सरकार से लेकर विभाग तक काफी हो-हंगामा हुआ था.

हंगामे के बाद उद्योग विभाग में एक जांच समिति बनायी गयी. जिसने कंबल घोटाला होने की पुष्टि नहीं की. लेकिन जांच से असंतुष्ट विपक्ष के हंगामे के बाद दोबारा से 28 सदस्यों की सात कमेटी बनी.

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सभी कमेटी में चार सदस्य थे. एक अध्यक्ष और तीन सदस्य. उनकी जांच रिपोर्ट भी रघुवर सरकार के दौरान ही विभाग के पास आ गयी थी. लेकिन रिपोर्ट में क्या है, ये बात ना ही मीडिया में लीक हुई और ना ही रिपोर्ट के आधार पर किसी तरह की कोई कार्रवाई हुई.

इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उस जांच समिति ने एजी की तरफ से की गयी सारी आपत्तियों को सही पाया है. यानि कि कंबल घोटाला हुआ. लेकिन कार्रवाई रघुवर दास की सरकार ने नहीं की.

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एजी की आपत्तियों के स्पोर्ट में है जांच समिति की रिपोर्टः के रवि कुमार, उद्योग सचिव

मामले पर न्यूज विंग ने उद्योग विभाग के सचिव के रवि कुमार से बात की. उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आ चुकी है. रिपोर्ट में जांच समिति ने एजी की आपत्तियों को सही पाया है. विभाग की तरफ से कार्रवाई की कार्यवाही हो रही है.

क्या रेणु गोपीनाथ पणिक्कर पर होगी कार्रवाई

कंबल घोटाला की मुख्य आरोपी झारक्राफ्ट की सीईओ रेणु गोपीनाथ पणिक्कर अभी कहां है किसी को नहीं पता. उनका दावा था कि कंबल घोटाला नहीं हुआ है. साथ ही उन्होंने तत्कालीन उद्योग विभाग के एमडी के रवि कुमार पर गंभीर आरोप भी लगाए थे.

रेणु गोपीनाथ पणिक्कर

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एजी के ऑडिट में घोटाले की बात सामने आने के बाद झारक्राफ्ट के तत्कालीन एमडी मंजूनाथ भजंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए रेणु गोपीनाथ पणिक्कर के पावर सीज कर दिये थे.

लिहाजा रेणु गोपीनाथ पणिक्कर को इस्तीफा देना पड़ा था. ऐसे में जब घोटाले की बात सच साबित हुई है तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिसे रघुवर दास की सरकार ने बचाया क्या उस रेणु गोपीनाथ पणिक्कर पर मौजूदा सरकार कार्रवाई करेगी.

जानिए कब क्या हुआ था

• लातेहार जिला के पोखरीतला से कुछ लोग 13 जनवरी को सीएस के कार्यालय में कंबल बनाने को लेकर शिकायत लेकर आ गए. शिकायत करने वाले सलाउद्दीन अंसारी, इमामुद्दीन हक, नईमुद्दीन अंसारी और मो. मुस्ताख का कहना था कि लातेहार जिले के पोखरीतला के जिस बुनकर को कंबल बनाने के काम दिया गया है और जिस पैमाने पर दिया गया है, उस काम को करने के लिए उसके पास लुम (करघा) है ही नहीं. विकास आयुक्त ने फौरन मामले की जांच करने के लिए उद्योग विभाग को लिखा.

• एक फरवरी को एमडी उद्योग ने जांच प्रक्रिया शुरू की. जांच के बाद पांच फरवरी को एमडी उद्योग ने जांच रिपोर्ट सौंपी. जांच में शिकायत सच पायी गयी. जिस बुनकर को कंबल बनाने का काम झारक्राफ्ट की तरफ से दिया गया था, उसके पास कंबल बनाने लायक लुम (करघा) ही नहीं था. जांच रिपोर्ट आने के बाद विकास आयुक्त ने बुनकर को दिए जाने वाले किसी भी भुगतान पर रोक लगा दी.

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• विकास आयुक्त अमित खरे ने 14 फरवरी को उद्योग विभाग के एमडी और सचिव सुनील बर्णवाल (जो तत्कालीन सीएम के प्रधान सचिव भी थे) को पूरे मामले को लेकर फाइनल प्रपोजल बानने को लिखा था.

• दोबारा 28 फरवरी को विकास आयुक्त ने फिर से पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने और दोषी कर्मियों पर कार्रवाई करने के लिए सुनील वर्णवाल को पत्र लिखा.

• दो अप्रैल को विकास आयुक्त ने एक बार फिर से सीएम को पूरे मामले की निगरानी जांच (एसीबी) करने को लिखा. 23 अप्रैल तक मामले को लेकर किसी तरह की जांच का आदेश सीएम कार्यालय की तरफ से नहीं आया है. जबकि सीईओ के इस्तीफे के बाद यह साफ हो गया है कि कंबल ना तो सखी मंडल से खरीदे गए और ना ही बुनकर समितियों की तरफ से बनाए गए हैं.

• लेकिन एसीबी से जांच ना कराते हुए उद्य़ोग विभाग से ही जांच करायी गयी. लेकिन जांच से राज्य का विपक्ष संतुष्ट नहीं था. बाद में 2018 के मई महीने में 28 सदस्यों की जांच समिति बनायी गयी. जिसमें एजी की आपत्तियों को सही पाया गया.

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