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आंगनबाड़ी केंद्रों में इंटरनेट, वाई-फाई की होगी सुविधाएं, सोलर लाइट और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का भी प्लान

 Amit Jha

Ranchi: आंगनबाड़ी केंद्रों की सूरत बदलने की तैयारी और तेज होनी है. इसके लिए समाज कल्याण विभाग, झारखंड ने अपने स्तर से कुछ प्लान तय किए हैं. राज्य भर में 38432 आंगनबाड़ी केंद्र हैं. इनमें अलग-अलग स्तर की सुविधाएं बढाने, बहाल करने के बहाने इसे मॉडल सेंटर या सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र के रुप में विकसित करने का प्लान है. आने वाले समय में इनमें इंटरनेट और वाइ-फाई की सुविधा दिए जाने की तैयारी है. एलइडी टीवी, पेन ड्राइव की भी व्यवस्था की जानी है. इसके जरिये केंद्र में बच्चों को स्कूली पूर्व शिक्षा एवं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के आयोजन में तकनीक के प्रयोग से बच्चों में लर्निंग स्किल डेवलप किए जाने की कोशिश होगी. साथ ही बच्चों की उपस्थिति और क्वालिटी एजुकेशन को भी बढ़ावा मिलने की आस है. केंद्रों में कुर्सी, डेस्क और दरी, लकड़ी की बजाए रसोई काम के लिए गैस कनेक्शन, सोलर लाइट, रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की भी व्यवस्था किए जाने की तैयारी है.

बच्चों के लिए ड्रेस

आंगनबाड़ी केंद्र को स्कूली पूर्व शिक्षा के केंद्र के तौर पर स्थापित करने का विचार सरकार का है. प्राइवेट स्कूलों की तरह उसके सुव्यवस्थित संचालन के लिए अन्य सुविधाओं के साथ साथ बच्चों के लिए पोशाक की भी व्यवस्था पर सरकार का ध्यान है. बच्चों में व्यक्तिगत साफ-सफाई और स्वच्छता को प्रोत्साहित करने को हर बच्चे को दो जोड़ी ड्रेस, दो जोड़ी मोजा और एक जोड़ी जूता उपलब्ध कराने की योजना है. बच्चों के नियमित वृद्धि के अनुश्रवण के लिए आंगनबाड़ी केंद्र में वजन मशीन तथा लंबाई मापने के लिए स्टीडियोमीटर की व्यवस्था होगी. इसी तरह से रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए पोषण ट्रैकर की व्यवस्था की जानी है. प्रव पूर्व जांच एवं टीकाकरण के लिए समुचित व्यवस्था, मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र के रख-रखाव में सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाए जाने पर जोर दिया जायेगा. इससे पोषण वाटिका, परिसर के रख-रखाव, पोषाहार में भागादारी, गोद भराई और अन्नप्राशन में सहयोग, आंगनबाड़ी की सेवाओं और कुपोषित बच्चों की पहचान में मदद मिलेगी. गुणवत्तापूर्ण सेवाएं और इसकी उपलब्धता के लिए भी कदम उठाए जाने हैं.

मॉडल आंगनबाड़ी के लिए हो रहे बेहतर कार्य

कई जिले ऐसे हैं जहां अलग अलग स्कीम, डीएमएफटी के जरिये कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल केंद्र बनाया भी गया है. पक्का भवन के अलावा उसकी चारदीवारी, बाल-सुलभ रंग-रोगन, पानी, सुरक्षित पेयजल, बिजली कनेक्शन की व्यवस्था, रसोईघर, भंडारण और अन्य व्यवस्था सुनिश्चित करने में मदद मिली है. इनमें धनबाद, पश्चिमी सिंहभूम, गुमला, दुमका जैसे जिले शामिल हैं. हालांकि यह भी सच है कि फंड के अभाव में पिछले चार सालों में राज्य में एक भी नया आंगनबाड़ी सेंटर नहीं खोला गया. अभी राज्य में 38432 सेंटर कार्यशील हैं. इनमें से 22438 में ही पेयजल की सुविधा है. 18397 में ही शौचालय की व्यवस्था है. वैसे राज्य सरकार ने पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में राज्य में 2500 आंगनबाड़ी केंद्र बनाने का फैसला लिया है. इसके लिए 277 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की जा चुकी है.

हर बच्चे को मिले सपनों को हासिल करने का मौकाः निदेशक

समाज कल्याण निदेशक शशि प्रकाश झा के मुताबिक, आइसीडीएस की सेवाएं 2 अक्टूबर 1975 को शुरू की गयी थी. आज यह योजना बच्चों के समग्र विकास के लिए दुनिया के सबसे बड़े और अनोखे कार्यक्रमों में से एक है. झारखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिये विभिन्न सेवाएं प्रदान की जाती हैं. इसके जरिये कुपोषण मुक्त झारखंड बनाने में राज्य सरकार अन्य विभागों, यूनिसेफ और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है. इस प्रयास से हर बच्चे के पास सपनों को हासिल करने और झारखंड को गौरवान्वित करने का पंख मिलेगा.

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