
Ranchi/Khunti : झारखंड के नक्सल इलाके सिर्फ नक्सलियों के नाम पर ही नहीं, बल्कि अफीम की खेती के रूप में भी विख्यात हो रहे हैं. राज्य में नक्सलवाद कमजोर होने के बाद भी अफीम की खेती रुकने का नाम नहीं ले रही है. खूंटी जिले के मुरहू, खूंटी, सयको एवं मरंगहादा थाना क्षेत्र में अफीम की खेती किये जाने की सूचना है. इन थाना क्षेत्रों में से सबसे अधिक अफीम की फसल अड़की थाना क्षेत्र में लगायी गयी है. जहां हजार एकड़ से अधिक अफीम की फसल तैयार है. जिन इलाकों में अफीम की खेती की जा रही, उन इलाकों में सबसे अधिक सुरक्षा बल भी तैनात हैं. इसके बाद भी जिला प्रशासन खूंटी अफीम की खेती को नहीं रोक पा रहा है.

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इन इलाकों में है सबसे अधिक अफीम की फसल
अड़की प्रखंड के साके, लोंगा गांव का हिदगीटोला,मोचीया गांव की मोचीया नदी किनारे, रायतोडंग, बड़ाइकेर ,तुयूगुटू, मरंगबुरू, कुरूंगा ,चड़ीडीह, डागोलोगा आदि गांवों में बड़े पैमाने में फसल लहलहा रही है, जिसे पुलिस प्रशासन भी नष्ट नहीं कर सका है. स्थानीय ग्रामीण कहते हैं कि सिर्फ अड़की प्रखंड में ही एक हजार एकड़ से अधिक इलाके में अफीम की फसल तैयार है.

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अड़की प्रखंड में सबसे अधिक सुरक्षा बल हैं तैनात
जनकार बताते हैं कि अड़की प्रखंड में नौ से अधिक सुरक्षा बलों के कैंप हैं. इसके बाद भी इलाके में अफीम की खेती नहीं रुक सकी है. सूचना के अनुसार अड़की प्रखंड में इन इलाकों में सुरक्षाबलों की तैनाती है.
1.कोचांग में कैप है
2.कुरूंगा में भी कैंप है, जो कोचांग कैंप से मात्र चार किलोमीटर की दूरी पर है
3.बीरबांकी कैंप है जो कुरूंगा से 5 किलोमीटर की दूरी पर है
4.कोरवा में कैंप बीरबांकी से पांच किलोमीटर दूरी पर है.
5.बडांड़ीं में कैंप जो कोरवा से चार किलोमीटर पर है
6.पुदहिसिर में कैंप जो बडांड़ीं से तीन किलोमीटर की दूरी पर है. ग्रामीणों के अनुसार यह खूंटी जिले के बॉर्डर सरायकेला- खरसवां जिले में आता है.
8.अड़की थाना परिसर से सटा हुआ कैंप है
9.हुंठ कैंप है
10.उल्लीहातु कैंप है
11.केवड़ा कैंप है
अफीम की फसल को लेकर क्या कहते हैं जानकार
एक एकड़ में अफीम की फसल लगाने से 4 से 6 किलोग्राम कच्चा अफीम तैयार हो जाता है .जिसे खूंटी के बाजारों में एक से डेढ़ लाख रुपया प्रति किलो की दर से व्यापारी एवं अफीम तस्कर खरीदते है. वहीं खूंटी से राजधानी रांची तक लाने में इसकी कीमत प्रति किलो एक लाख बढ़़ जाती है . अफीम की खेती के लिए ग्रामीणों को फसल लगाने की पूंजी अफीम तस्कर ही उपलब्ध कराते हैं. साथ ही व्यापारियों एवं तस्करों के द्वारा अफीम के लिए बाजार भी उपलब्ध कराया जाता है.
अफीम की फसल नष्ट करने के नाम पर खानापूर्ति हो रही है : मंगल सिंह मुंडा
अफीम की खेती के विरुद्ध अभियान चलाने वाले अड़की के मंगल सिंह मुंडा कहते हैं कि अफीम की फसल के बारे में सूचना देने के बाद भी जिला प्रशासन के द्वारा अफीम की खेती नष्ट करने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है . पुलिस के द्वारा अफीम की तैयार फसल आधी-अधूरी नष्ट की जा रही है. अड़की थाना क्षेत्र में हजारों एकड़ अफीम की फसल तैयार है. प्रखंड में सुरक्षा बलों की मौजूदगी को लेकर मंगल सिंह मुंडा कहते हैं कि यहां राज्य में सबसे अधिक सुरक्षा बल मौजूद हैं. इसके बाद भी जिला प्रशासन क्यों अफीम की खेती रोक नहीं पा रहा है.
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