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बाबूलाल को नेता प्रतिपक्ष बनाने के लिए एक बार फिर राजभवन पहुंची भाजपा

Ranchi: बाबूलाल मरांडी को भाजपा विधायक दल का नेता चुना जा चुका है. भाजपा में उनकी वापसी का आधार भी यही था. परंतु अब तक उन्हें नेता प्रतिपक्ष औपचारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है. विधानसभा स्पीकर के पास उनका मामला लंबित पड़ा हुआ है.

प्रदेश भाजपा इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को राजभवन पहुंची. राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से गुहार लगायी. उनसे बाबूलाल को नेता प्रतिपक्ष घोषित करने में मदद मांगी. इसके लिये सरकार को निर्देश देने और नेता प्रतिपक्ष के नाते उन्हें सभी संवैधानिक सुविधा उपलब्ध कराने की भी अपील की. 20 मार्च को भी भाजपा ने राजभवन जाकर इसके लिए आग्रह किया था.

राज्यपाल से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दीपक प्रकाश, प्रदेश महामंत्री आदित्य साहू और डॉ प्रदीप वर्मा भी शामिल थे.

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विधानसभा में अब तक नेता प्रतिपक्ष नहीं

दीपक प्रकाश के अनुसार हेमंत सरकार लोकतंत्र की हत्या कर रही है. सरकार चाहती ही नहीं है कि नेता प्रतिपक्ष की घोषणा हो. बगैर उसके ही विधानसभा का संचालन किया जाये. खुद सीएम ने कई मौकों पर ऐसे बयान दिये हैं जिससे उनकी मंशा जाहिर होती है. विधानसभा अध्यक्ष भी सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं.

झाविमो का भाजपा में हो चुका है विलय

भाजपा में वापसी से पहले बाबूलाल मरांडी झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के प्रमुख थे. उनकी पार्टी का 11 फरवरी, 2020 को भारतीय जनता पार्टी में विलय हो चुका है. 06 मार्च  को चुनाव आयोग ने इस विलय पर अपनी सहमति भी दे दी है.

राज्यसभा चुनाव की वोटिंग में आयोग ने मरांडी को भाजपा विधायक के रूप में मान्यता प्रदान की थी. झाविमो के भाजपा में विलय के समय दो विधायकों प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को बाहर कर दिया गया था. इसके बाद उन दोनों ने जेवीएम का कांग्रेस में विलय की बात कही थी जिसे आयोग ने नहीं माना था. पार्टी के कंघी सिंबल को भी फ्रिज किया जा चुका है.

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बीजेपी विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी

सदन में भाजपा के 26 विधायक हैं. विधानसभा में 32 प्रतिशत सदस्यों के साथ भाजपा विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है. इसके बावजूद भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं मिल पाया है.

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