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Ranchi: रघुवर दास बनाम सरयू राय के मामले ने तूल पकड़ा हुआ है. सरयू राय ने लगातार कई मामलों पर सरकार को जांच और कार्रवाई के लिए चिट्ठी लिखी. लेकिन कार्रवाई नहीं होने से वो आजकल नाराज चल रहे हैं. उन्होंने अपने मन की बात राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के पास भी रखी है. साफ तौर से 28 तक किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से आग्रह किया है. इधर डैमेज कंट्रोल के लिए पार्टी की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष लक्षमण गिलुआ से कहा गया है. बताया जा रहा है कि मसले पर मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा और लुईस मरांडी से लक्षमण गिलुआ ने बात भी की है. क्या होगा अभी कहना जरा जल्दीबाजी होगी. लिहाज टीम न्यूज विंग ने इसी मामले पर ग्यारह विधायक समेत दो मंत्रियों से बात की. दस में से चार विधायकों ने पूरे प्रकरण पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया. वहीं छह विधायकों ने अपनी बात रखी. जानिये किसने क्या कहा.
चिट्ठी लिखनी चाहिये थी, लेकिन सार्वजनिक नहीं करना चाहिये था : राधा कृष्ण किशोर
सरयू राय जी एक गंभीर, सुलझे हुए और संसदीय व्यक्ति हैं. विधायी मामले के जानकार व्यक्ति हैं. उनका एक अलग व्यक्तित्व है. मंत्रिपरिषद में कई तरह की जिम्मेदारियां होती हैं. इनको निश्चित तौर से मंत्रियों को अपनी भावन से अवगत कराने का हक है. मुख्यमंत्री जी को भी इनकी भावन से अवगत होते हुए यह प्रयास किया जाना चाहिये कि इनकी परेशानी को दूर किया जाये. आखिर में यही होगा कि मिलबैठ कर बात करना होगा. इस पांच साल के कार्यकाल में सवा चार साल निकल गया. ऐसे में आठ महीने के अंदर लोकसभा का चुनाव है. ऐसे में मामला सार्वजिनक नहीं होना चाहिये. जो भी उनको निर्णय लेना है, वो लेकर बात सार्वजनिक करते. साव चार साल निकल जाने के बाद ऐसा करना अच्छा नहीं लगता है.
क्यों नहीं लिखी जानी चाहिये चिट्ठीः लुईस मरांडी
कैबिनेट मिनिस्टर होने के नाते कोई भी मंत्री सीएम को पत्र नहीं लिख सकते हैं, ऐसा नहीं है. चिट्ठी लिखने में कोई दिक्कत नहीं है. मैंने भी कई बार अपनी बात चिट्ठी के माध्यम से लिखी ही है. लिखना कोई गलत बात नहीं है. सीएम के सामने अगर कोई गंभीर विषय आया होगा तो नियम-कानून को देखते हुए कार्रवाई कर ही रहे होंगे.
मिलकर बात रखनी चाहिये, चिट्ठी नहीं लिखनी चाहिएः बिरंची नारायण
मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि पार्टी में कोई कितने भी बड़े पद पर हो, अगर अपनी बात रखनी है, तो उपयुक्त जगह पर मिलजुल कर रखनी चाहिये. चिट्ठी लिखना गुनाह नहीं है, बल्कि चिट्ठी सार्वजनिक करना ठीक नहीं है. खास कर ऐसे समय में जब पूरा देश मोदी जी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाह रहा है. इससे वातावरण खराब होगा. मिलकर बात रखनी चाहिये, चिट्ठी नहीं लिखनी चाहिये.
निष्पक्ष एजेंसी से करानी चाहिये थी जांचः रामचंद्र सहिस
सरयू राय कैबिनेट मंत्री हैं, जब घोटालों से जुड़ी बातों को उन्होंने सीएम के संज्ञान में लाया, तो सीएम को तुरंत संज्ञान लेना चाहिये था. जांच निश्पक्ष एजेंसी से करानी चाहिये थी. ऐसा नहीं करने की वजह से सरकार की छवि धूमिल हुई है. सरयू राय जैसे वरिष्ठ नेता के बातों की अवहेलना की गयी है. जांच करा कर सरकार को रिपोर्ट उजागर करना चाहिये.
सभी की जांच हो जाये, जरूरी नहीः मनीष जायसवाल
कार्रवाई एक बड़ा सब्जेक्ट होता है. किसी के लिख देने से, किसी के बोल देने से कार्रवाई नहीं होती है. हम भी अगर कोई चिट्ठी सीएम को लिखते हैं, तो पहले सूचना दी है. सूचना देने के बाद अगर तथ्य में दम होगा, तो कार्रवाई भी होगी. किसी भी विधायक को लिखित तौर पर कोई सूचना देने में क्या दिक्कत है. जो चीज मुझे गलत लगती है, जरूरी नहीं है कि वो चीज सभी को गलत लगे. अपने-अपने सोचने का तरीका होता है. अगर सरकार को लगेगा कि कार्रवाई होनी चाहिये तो कार्रवाई होगी. आज कल 100 फीसदी चीजों में कम्पलेन होता है. अगर सभी की जांच ही होने लगे, अनवानटेड चीजों की भी जांच होने लगे, तो उसका कोई नतीजा नहीं निकलेगा.
होनी चाहिये थी जांचः योगेश्वर महतो बाटुल
भ्रष्टाचार के खिलाफ हर हाल में लड़ाई लड़नी चाहिये. कोई नहीं चाहेगा कि भ्रष्टाचार हो. देखने वाली बात यह होनी चाहिये आखिर उन्होंने किन मामलों पर चिट्ठी लिखी है. तकनीकी रूप से आखिर घोटाला हुआ कैसे है. अगर इसकी जानकारी है, तो निश्चित रूप से जांच होनी चाहिये. किसी भी कीमत पर भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करना चाहिये.
मंत्री सहित पांच विधायकों ने टिप्पणी करने से किया इंकार
सीपी सिंहः जब मामले को केंद्रीय नेतृत्व देख रहा है, तो मैं कैसे टिप्पणी कर सकता हूं.
नवीन जायलवालः मैं काफी छोटा कार्यकर्ता हूं. मामले पर कुछ नहीं कहूंगा. प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं.
रामकुमार पाहनः बहुत छोटा कार्यकर्ता हूं. मामले पर टिप्पणी नहीं कर सकता.
जानकी यादवः प्रकरण संज्ञान में नहीं है, ईलाज के लिए बाहर आया हुआ हूं.
ताला मरांडीः सवाल सुनने के बाद कहा कि आधा घंटा दीजिए तभी कुछ कह पाऊंगा. लेकिन फिर मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया.
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