
New Delhi: भारतीय जनता पार्टी अपने कैडर को पार्टी की विचारधारा की ट्रेनिंग दे रही है. कार्यकर्ताओं के लिए लगाये गये विशेष ट्रेनिंग कैंप में भाजपा ने अपने कैडर को विचारधारा के विपरीत जाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की नसीहत भी दी है.
कार्यकर्ताओं को यह सीख दी जा रही है कि पार्टी की कोर विचारधारा के खिलाफ जाने पर उन्हें पद से हटाया जा सकता है. इस कैंप में कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दे रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नेता ने इसके लिए किसी और का नहीं, बल्कि भाजपा के ‘पितामह’ कहे जानेवाले लालकृष्ण आडवाणी का उदाहरण दिया है.
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बीजेपी के ‘पितामह’ आडवाणी का दिया जा रहा उदाहरण
नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार, इस खास प्रशिक्षण शिविर में कार्यकर्ताओं को विचारधारा की सीख देते हुए पार्टी के भीष्म पितामह मानेजाने वाले एलके आडवाणी का उदाहरण दिया जा रहा है.
कैंप के दौरान कार्यकर्ताओं को बताया गया कि 2005 में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को सेक्युलर बताने पर आडवाणी को बीजेपी के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था.
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, आडवाणी को कट्टर हिंदू राष्ट्रवादी नेता के तौर पर जाना जाता था, लेकिन जिन्ना की तारीफ करना उनकी इस छवि के विपरीत था. विश्लेषक मानते हैं कि इस प्रसंग से आडवाणी का करियर एक तरह ढलान पर आ गया.
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पार्टी ने भले ही 2009 में उन्हें पीएम उम्मीदवार चुना था, लेकिन आडवाणी पहले जैसी रंगत में कभी न आ पाए. वहीं लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान पार्टी ने उन्हें गांधीनगर से टिकट भी नहीं दिया, जिससे उनकी चुनावी राजनीति के सफर का भी अंत हो गया.
कल्याण सिंह का भी दिया गया उदाहरण
पार्टी कार्यकर्ताओं को आडवाणी के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और अयोध्या आंदोलन के पोस्टर बॉय रह चुके कल्याण सिंह का भी उदाहरण दिया जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि 2009 में समाजवादी पार्टी (एसपी) को समर्थन देने की घोषणा के कारण बीजेपी ने बाहर का रास्ता दिखाया था. 2014 में वो दोबारा बीजेपी में शामिल हुए और राजस्थान के राज्यपाल नियुक्त हुए.
पार्टी की विचारधारा से ऊपर कुछ नहीं- राठौड़
आडवाणी का उदाहरण दिये जाने को लेकर यूपी बीजेपी के उपाध्यक्ष जेपी राठौड़ ने कहा कि कोई भी शख्स विचारधारा से ऊपर नहीं है.
उन्होंने बताया, ‘यही बात पार्टी कैडर को बतायी गयी है. उन्हें बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के उदाहरण दिए गए हैं जिसमें आडवाणी जी भी शामिल हैं जिन्हें पार्टी विचारधारा से अलग बयान देने पर अध्यक्ष पद खोना पड़ा था.’ राठौड़ प्रदेश के सभी छह क्षेत्रों में आयोजित किए जा रहे प्रशिक्षण शिविरों की देखरेख कर रहे हैं.
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