
Giridih: गिरिडीह के गांवों में संक्रमण का चैन तोड़ने के लिए सरकार डोर-टू-डोर सर्वेक्षण अभियान चला तो रही है, मगर, जिन पर अभियान की जिम्मेदारी है वही असुरक्षित हैं. आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएं रोज जोखिम उठाकर घर-घर पहुंचकर सैंपल कलेक्ट कर रहीं हैं.
सरकार व स्वास्थ्य विभाग की ओर से इनके लिए मास्क तक उपलब्ध नहीं कराया गया है. ग्लब्स, फेसशील्ड, सैनेटाइजर तो दूर की बात है. ऐसे में इन कर्मियों पर खुद संक्रमण का खतरा मंडराता रहता है.
हद तो तब हो रही है जब डोर-टू-डोर सर्वेक्षण के दौरान ग्रामीणों का ऑक्सीजन लेबल जांच करने वाला सरकार द्वारा दिया गया डिवाईस आक्सीमीटर भी खराब हो चुका है. इन महिला कर्मचारियों को कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिया गया.
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ये जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अलका हेम्ब्रम भी मानती हैं, लेकिन क्यों नहीं मिला ये बताने से समाज कल्याण पदाधिकारी इंकार करती है.
यही नहीं पिछले दो माह से इन महिला कर्मियों को उनका 12 हजार का मानदेय तक का भुगतान नहीं हो पाया है. इसके बाद भी आंगनबाड़ी केंद्र की महिला कर्मी लगातार चार दिनों से डोर-टू-डोर सर्वेक्षण में जुटी हुई है.
जानकारी के अनुसार पूरे जिले में दो हजार चार सौ 31 आंगनबाड़ी केंद्र हैं. दो हजार तीन सौ 75 सेविकाएं हैं और दो हजार दो सौ 69 सहायिका कार्यरत हैं. जिन पर पूरे जिले के ग्रामीण क्षेत्र में डोर-टू-डोर सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी है.
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