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भूख और ठंड से आदिम जनजाति की बुधनी की मौत! बहू ने किसी तरह दो दिनों में जुगाड़े पैसे, तब हुआ अंतिम संस्कार

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  • लातेहार के महुआडांड़ प्रखंड निवासी थी बुधनी बिरजिया
  • पैसे के आभाव में दो दिनों तक घर में ही पड़ा रहा बुधनी का शव
  • 2016 से 2018 के दौरान 18 लोगों की भूख से मौत का दावे

Latehar/Ranchi : एक तरफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम की बात और दूसरी तरफ भूख से मौत. इनके बीच राज्य सरकार अब तक सामंजस्य नहीं बैठा पा रही है. दावों के मुताबिक, वर्ष 2016 से लेकर 2018 तक 18 लोगों की मौत भूख से हो चुकी है. लेकिन, यह सिलसिला अब तक थमा नहीं है. नये साल के पहले दिन फर्स्ट जनवरी को ही आदिम जनजाति की वृद्ध महिला (80 वर्ष) बुधनी बिरजिया की मौत हो गयी. दावा किया जा रहा है कि बुधनी की मौत भूख और ठंड लगने से हुई है. न बुधनी को अनाज मिला और न ही हाड़ कंपाती ठंड से निजात पाने के लिए कंबल ही नसीब हुआ. स्थानीय लोगों ने बताया कि बुधनी अंबाटोली में पिछले 45 साल से रह रही थी. स्थानीय लोगों के अनुसार बुधनी की मौत ठंड और भूख की वजह से हुई है. पिछले कई दिनों से घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं था. गांववाले ही कुछ अनाज देते थे, जिससे उसके परिवार का गुजारा होता था.

अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं थे पैसे, दो दिनों तक घर में पड़ा रहा शव

विडंबना ऐसी कि बुधनी की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए भी परिजनों के पास पैसे नहीं थे. इस वजह से दो दिनों तक बुधनी का शव घर में ही पड़ा रहा. बुधनी के पोते बसंत बिरजिया ने न्यूज विंग से बात करते हुए कहा, “में खुद दूसरी जगह रहकर मजदूरी करता हूं.  मेरा परिवार पिछले कई महीनों से आर्थिक तंगी से गुजर रहा है. परिवार को किसी तरह की सरकारी सुविधा नहीं मिलती है. मेरी दादी (बुधनी) की मौत एक जनवरी को भूख और ठंड की वजह से हो गयी थी. घर में पैसा नहीं होने के कारण घर में मेरी मां सनकी बिरजिया पैसे के लिए अपनी बेटी के पास चली गयी. जब वहां कुछ पैसे का जुगाड़ हुआ, तो मेरी मां दादी के अंतिम संस्कार के लिए गुरुवार की सुबह अंबाटोली पहुंची.” गुरुवार को ही बुधनी का अंतिम संस्कार किया गया. गुरुवार की सुबह ही प्रशासन को सूचना मिली, तो प्रशासन ने आनन-फानन में अंतिम संस्कार के लिए 2000 रुपये दिये.

न राशन मिल रहा है न पेंशन

सरकारी योजना के बारे में पूछे जाने पर बंसत बिरजिया ने कहा, “हमें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. न ही सरकार से राशन मिल रहा है, न ही कोई पेंशन. मनरेगा योजना में भी काम नहीं होने की वजह से दूसरी जगह पर जाकर काम करना पड़ता है.”

क्या कहते हैं महुआडांड़ के सीओ

महुआडांड़ सीओ जुल्फिकार अंसारी ने बताया कि वृद्धा बुधनी की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है. वैसे सूचना मिलने पर वे लोग वहां गये और प्रशासन की ओर से 2000 रुपये परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए दिये. बुधनी के परिवार के पास राशन कार्ड था या नहीं, सीओ इसका जवाब नहीं दे पाये.

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