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पाकुड़ में सक्रिय बंगाल के मानव तस्कर, नाबालिगों से करवाते हैं अनैतिक कार्य

Pakur : जिले में पुलिस और चाइल्ड लाइन से जुड़ी संस्था के द्वारा कारवाई के बाद भी मानव तस्करी रुकने का नाम ले रहा है. नाबालिग लड़के और लड़कियों को अच्छी नौकरी का झांसा देकर उनकी तस्करी का काम नहीं थम रहा है.

मानव तस्करी के इस धंधे में बंगाल के कई किंगपिन सक्रिय हैं. ये लोग भोले-भाले आदिवासियों और गरीब लोगों को बहला-फुसलाकर अपने साथ महानगरों में ले जाते हैं और फिर उनसे कूड़ा चुनने समेत कई तरह के अनैतिक कार्य करवाते हैं.

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मानव तस्करी पर पूरी तरह से नहीं लग रहा लगाम

मानव तस्करी के रोकथाम के लिए जिले में कई संस्थाएं कार्यरत हैं. संस्था के सदस्यों द्वारा समय-समय पर कार्रवाई करते हुए बाहर भेजे जा रहे बच्चे भी बरामद किये जा रहे हैं.

लेकिन कार्रवाई के दौरान कई बार दलाल फरार हो जाते है. जिसका परिणाम यह होता है कि ये दलाल फिर से नाबालिकों को बेवकुफ बनाते हैं और फिर उनकी तस्करी करते हैं. जरूरी यह है कि पहले इन दलालों को पकड़ा जाये और इनपर कार्रवाई की जाये.

कई बार पुलिस और मानव तस्करी के खिलाफ काम करने वाले संस्थानों के द्वारा बच्चों को तस्करी से बचाया जाता है. लेकिन फिर भी इसपर पूरी तरह से लगाम नहीं लग पा रहा है.

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बंगाल के दलाल हैं सक्रिय

मिली जानकारी के अनुसार पाकुड़ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से नाबालिगों को बहला-फुसलाकर महानगरों में ले जाने में बंगाल के दलाल सक्रिय हैं. दलाल मालदा, कालियाचक, फरक्का, मुरारई इलाकों में सक्रिय हैं.

ये दलाल नाबालिग बच्चों के परिजनों को हजार-दो हजार रुपये देते हैं और फिर उन्हें अपनी बातों में फंसाकर उनके बच्चों को अपने साथ दिल्ली, कोलकाता, मुंबई आदि महानगरों में ले जाते हैं.

यहां नाबालिगों से कूड़ा चुनने के अलावा अन्य कई प्रकार के अनैतिक कार्य करवाते हैं. होटलों, ढाबों, फैक्ट्री आदि में भी नाबालिगों से काम लिया जाता है.

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मानव तस्कर नहीं होते गिरफ्तार

नाबालिगों को अपने साथ ले जाने वाले दलाल रेलवे स्टेशन, बस अड्डों के आसपास घूमते रहते हैं. उनकी नजर पुलिस प्रशासन, संस्था के सदस्यों पर रहती है. नाबालिगों को ट्रेन, बस में चढ़ाने के बाद वह भी दूसरे डिब्बे में सवार हो जाते हैं.

रेल पुलिस, स्थानीय थाना पुलिस व किसी संस्था द्वारा कार्रवाई के पहले ही दलाल फरार हो जाते हैं. बरामद नाबालिग से पूछने पर वह दलाल का नाम, पता नहीं बता पाते हैं.

मिली जानकारी के मुताबिक पिछले तीन माह में करीब 90 नाबालिगों को पाकुड़ रेलवे स्टेशन के अलावा विभिन्न स्थानों से सकुशल बरामद किया गया है. इसमें रेल पुलिस का भी सहयोग रहा है. जून माह में विभिन्न स्थानों से 45, जुलाई माह में 15, अगस्त में 12 व सितंबर माह में अब तक 15 नाबालिगों का रेस्क्यू किया गया है.

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