
Ranchi : सूचना अधिकार कानून को कमजोर किया जा रहा है. चाहे यूपीए की सरकार हो या एनडीए की. दोनों ही सरकारों के लिए आरटीआइ गले की हड्डी है. उक्त बातें भारतीय सूचना अधिकार रक्षा मंच के केंद्रीय अध्यक्ष रविकांत ने कहीं.
बुधवार को मंच की ओर से चतरा में बैठक का आयोजन किया गया. इस दौरान रविकांत ने कहा कि जब से आरटीआइ लागू हुआ है तब से सरकारों का रवैया इस कानून के प्रति गैर जिम्मेदाराना रहा. तभी तो झारखंड सहित देश के तमाम राज्यों में गठित सूचना आयोगों में सूचना आयुक्तों की कमी है.
साथ ही साथ संसाधनों की भी घोर कमी है. इतना ही नहीं पिछले 15 वर्षों में इस कानून का सरकारी स्तर से कोई प्रचार-प्रसार भी नहीं किया गया है. ऐेसे में लोगों में इस कानून के प्रति जागरूकता कम देखी जाती है. वहीं इसका उपयोग भी नहीं होता.
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सरकार के कार्य में पारदर्शिता लाना
रविकांत ने कहा कि मंच कानून के प्रचार के लिए कार्यरत है. इसके लिए जिलों में बैठकें की जा रही हैं. लोगों को समझाना होगा कि सूचना का अधिकार कानून का प्रयोग भ्रष्टाचार, सरकारी रुके हुए कार्यों में गति, न्याय, शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उपयोगी है. इससे सरकार की जवाबदेही जनता के प्रति स्पष्ट होती है. साथ ही सरकारी कार्यों में पारदर्शिता भी आती है.
उन्होंने कहा कि देश में बहुत कम लोग ही इसका उपयोग करते हैं. लेकिन आयुक्तों की कमी के कारण मामले लटक जाते हैं. ऐसा करना सरकार की बड़ी साजिश है. उन्होंने कहा कि सरकार को आरटीआइ के प्रति जवाबदेह होना होगा. इस दौरान मुकेश निराला, ललन राम, रवि कुमार, सुबोध कुमार सिंह, दिलीप कुमार समेत अन्य लोग उपस्थित थे.
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