
Ranchi : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आज समापन हुआ और साथ ही सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई. अपने समापन भाषण में स्पीकर रवींद्र नाथ महतो ने कहा कि कुल पांच दिनों का यह सत्र कई मायनों में सार्थक रहा. सत्र के पहले दिन, सभा द्वारा गत सत्र में स्वीकृत तथा राज्यपाल द्वारा अनुमत विधेयकों की विवरणी को सभा पटल पर रखा गया साथ ही आश्वासनों पर सरकार द्वारा कृत कार्रवाई प्रतिवेदन भी सदन में उपस्थापित किया गया.
सत्र के अगले दिन प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण की सूचनाओं जैसे नियमित कार्यों के अलावे वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए “दो हजार नौ सौ छब्बीस करोड़ बारह लाख” रुपये के द्वितीय अनुपूरक व्यय विवरणी का उपस्थापन हुआ जिसके अनुदान मांगों पर वाद- विवाद, सरकार का उत्तर तथा मतदान दिनांक 20 दिसंबर को हुआ.
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साथ ही झारखंड विनियोग (संख्या-04) विधेयक, 2021 का पुरःस्थापन और सदन की स्वीकृति भी इस तिथि को हुई. 21 दिसंबर के महत्वपूर्ण विधायी कार्यों के अंतर्गत “झारखंड राज्य आवास बोर्ड (संशोधन) विधेयक,2019” को सभा द्वारा वापस लिया गया.
इस विधेयक को विधान सभा द्वारा फरवरी, 2019 में पारित किया गया था. इस तिथि को ही एक बेहद महत्वपूर्ण विधेयक “झारखंड (भीड़ हिंसा एवं भीड़ लिंचिंग) विधेयक, 2021 को सदन में पुरःस्थापित किया गया और इसकी स्वीकृति भी सदन द्वारा दी गई.
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सत्र के अंतिम दिन नियमित कार्यों के साथ वित्त मंत्री द्वारा 31 मार्च, 2020 एवं 31 मार्च, 2021 को समाप्त हुये वर्ष के लिए भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का झारखंड राज्य के लेखा परीक्षा प्रतिवेदन राज्य वित्त, वित्त लेखे एवं विनियोग लेखे को जिसे विधान सभा के समक्ष रखने हेतु भारत सरकार के नियंत्रक – महालेखा परीक्षक ने राज्यपाल के पास भेजा है, को सभा पटल पर रखा गया.
इसके अलावे अंतिम दिन कुल तीन विधेयक “कोर्ट फीस (झारखंड संशोधन) विधेयक, 2021” , “झारखंड विद्युत शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2021” और “पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय विधेयक, 2021” की भी सदन की स्वीकृति मिली.
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पूरे सत्र काल में कुल 293 प्रश्न स्वीकृत किये गए. 99 शून्यकाल प्राप्त हुए जिनमें 88 स्वीकृत हुआ. ध्यानाकर्षण की 20 सूचनाएं स्वीकृत हुई जिनमे 07 उत्तरित हुआ.
लोकहित के विषयों पर कुल 31 निवेदन की सूचनायें और 36 गैर सरकारी संकल्प लिये गये. कुछ समितियों के प्रतिवेदन भी सदन पटल पर उपस्थापित किए गये.
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