
NewDelhi : चारों तरफ बर्फ से घिरा अंटार्कटिका उपद्वीप तेजी से गर्म हो रहा है. खबर है कि यहां रेकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया है. नॉर्दर्न अंटार्कटिका में अब तक का सबसे ज्यादा तापमान 18.3 डिग्री सेल्सियस रेकॉर्ड किये जाने की खबर है. यह अब तक का सबसे ज्यादा तापमान है. जान लें कि अंटार्कटिका को स्नो, आइस और पेंगुइन के लिए जाना जाता है.
एक अर्जेंटाइन रिसर्च बेस, ऐस्परेंजा (Esperanza) पर गुरुवार को यह तापमान रेकॉर्ड किया गया. हालांकि अभी वर्ल्ड मीटरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) द्वारा इस रीडिंग को वेरिफाई किया जाना बाकी है. ऑर्गनाइजेशन के लिए रेकॉर्ड किये जाने वाले तापमान की रिसर्च करने वाले रैनडैल केरवैनी ने इस संबंध में कहा, अभी तक हमने जो देखा है उससे संकेत मिलते हैं कि यह रेकॉर्ड वैध है. उन्होंने बताया कि इस रीडिंग की पुष्टि करने के लिए वह पूरे डेटा को आने का इंतजार कर रहे हैं.
Esperanza पर वैज्ञानिकों ने कहा कि यह इकलौता रेकॉर्ड नहीं है जो इस हफ्ते टूटा है. अंटार्कटिका के मारांबियो साइट पर फरवरी 1971 के बाद से सबसे ज्यादा तापमान रजिस्टर किया गया. थर्मोमीटर्स ने 14.1 डिग्री सेल्सियस तापमान रेकॉर्ड किया जो कि फरवरी 2013 से ज्यादा है.
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कई द्वीप, देश व तटीय शहर डूब जायेंगे
ग्रीनपीस के लिए अंटार्कटिक को लेकर एक अभियान को लीड कर रहीं फ्रीडा बेंग्ट्सन ने कहा, ये रिपॉर्ट्स बहुत खौफनाक हैं, लेकिन चौंका देने वाली हैं. उन्होंने आगे कहा, हम पिछले एक महीने से अंटार्कटिक में हैं और नाटकीय बदलाव को नोट कर रहे हैं. पिछले महीने हमने पेंगुइन कॉलोनियों में खासी कमी देखी. इसकी वजह इसके मूल पर्यावरण में क्लाइमेट बदलाव का होना है.
आशंका है कि यही हालात रहे तो अंटार्कटिक से इतनी बर्फ पिघलेगी जो समुद्र का जलस्तर अगले आठ दशक में तीन मीटर बढ़ा देगी. इससे कई द्वीप, देश व तटीय शहर डूब जायेंगे. वैज्ञानिकों का दावा है कि बढ़ते वैश्विक तापमान से अंटार्कटिक पर औसतन 1.9 किमी मोटी परत के रूप में मौजूद बर्फ बिखरने को है. इसके पिघलने की गति 1979 से 2017 तक छह गुना बढ़ चुकी है। कई ग्लेशियरों में दरारें आ रही हैं.
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पूरी बर्फ पिघली तो 60 मीटर बढ़ेगा समुद्र जलस्तर
अनुमान है कि बर्फ पिघलने की इस दर से अगले 100 वर्ष में समुद्र जलस्तर तीन मीटर बढ़ेगा. यह दुनिया की बड़ी तबाही होगी. 1.42 करोड़ वर्ग किमी क्षेत्र के अंटार्कटिक की पूरी बर्फ पिघल जाये तो जलस्तर 60 मीटर बढ़ जायेगा. यह पृथ्वी पर प्रलय ले आयेगा
मालदीव, जकार्ता, ढाका, वेनिस, एलेक्सेंड्रिया डूब जायेंगे

बढ़ते जलस्तर का खतरा कितना वास्तविक है इसे ऐसे समझें कि साल 2100 तक हिंद महासागर में मौजूद मालदीव डूब जायेगा. आज वह भारत, श्रीलंका व ऑस्ट्रेलिया से जमीन खरीद अपने नागरिकों को जलवायु शरणार्थी बनने से बचाने में जुटा है. इंडोनेशिया का जकार्ता, नाइजरिया का लागोस, अमेरिका का ह्यूस्टन, फ्लोरिडा व न्यू ओरलियंस, बांग्लादेश का ढाका, इटली का वेनिस, वर्जिनिया का वर्जिनिया बीच, थाइलैंड का बैंकॉक, नीदरलैंड का रोट्रडम और मिस्र का एलेक्सेंड्रिया शहर भी डूबने के कगार पर हैं.
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