
Gyan Ranjan
Ranchi: देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस की गजब कहानी है. जो उसके साथ रहती है उसे सिर पर बिठा लेती है और जो उसके साथ नहीं आता उसे दलबदलू करार देती है. उसके खिलाफ हर हथकंडा अपनाती है. ताजा मामला झारखंड कांग्रेस का है. वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में झाविमो से तीन विधायक जीतकर आये. जिसमें से एक ने भाजपा का दामन थाम लिया और दो कांग्रेस के साथ आ गए. जो कांग्रेस के साथ आ गए उसे पार्टी सही मानती है लेकिन जिसने भाजपा का दामन थामा उसके खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष के न्यायाधिकरण में दल बदल का मामला ठोक दिया.
वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा के टिकट पर बाबूलाल मरांडी, प्रदीप यादव और बंधु तिर्की चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे. बाबूलाल मरांडी ने पहले पूरी पार्टी का विलय भाजपा में कर दिया. प्रदीप यादव और बंधू तिर्की ने इसका विरोध किया और बाद में दिल्ली जाकर कांग्रेस में शामिल हो गए.
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कांग्रेस विधायक दीपिका पाण्डेय सिंह और भूषण तिर्की ने बाबूलाल मरांडी के खिलाफ स्पीकर के न्यायाधिकरण में दल बदल की शिकायत की जिसपर अभी सुनवाई चल रही है.
एक तरफ कांग्रेस के विधायक बाबूलाल के खिलाफ दल बदल का मामला दर्ज कराते हैं वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी वैसे विधायक जिसे अभी तक विधानसभा और चुनाव आयोग से कांग्रेस पार्टी की सदस्यता नहीं मिली है, उसे पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बना देते हैं.
सवाल यह उठता है कि जब विधायक बंधू तिर्की का मामला स्पीकर के न्यायाधिकरण में चल रहा हो, उन्हें कांग्रेस की सदस्यता नहीं मिली हो तब कांग्रेस पार्टी किस आधार पर उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया. झारखंड कांग्रेस का एक खेमा भी इसको लेकर सवाल खड़ा कर रहा है.
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विधायक सरयू राय ने उठाये सवाल
विधायक बंधु तिर्की को कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद झारखंड की राजनीति में भी चर्चा का बाजार गरम है. पूर्व मंत्री सरयू राय ने कहा कि सत्ता और प्रतिपक्ष को अब अपनी रार छोड़कर एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए.
हाल ही में कांग्रेस ने जो नई कार्यसमिति बनाई है, उसमें झाविमो से गए बंधु तिर्की को प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. वे जब कांग्रेस के पदाधिकारी हो सकते हैं तो उसके विधायक क्यों नहीं.
सरकार को बंधु तिर्की, प्रदीप यादव को कांग्रेस का विधायक मानना चाहिए और इसी आधार पर बाबूलाल मरांडी को भी नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मुख्य प्रतिपक्षी दल के रूप में भाजपा है ही.
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