
Ranchi: प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने भवन निर्माण विभाग को करप्शन की गंगोत्री बताया है. साथ ही कहा है कि यह विभाग राज्य को दीमक की तरह चाट रहा है. पिछले 22 वर्षों में इस विभाग ने भ्रष्टाचार के कीर्तिमान स्थापित किए हैं. इसकी जांच कराने को वे अब ईडी और सीएम हेमंत सोरेन से भी मिलेंगे. गुरुवार को मीडिया को सूचना जारी करते हुए बताया कि विभाग में टेंडर आवंटन में मनमानी जारी है. उदाहरण देते कहा कि भवन निर्माण विभाग प्रमंडल-1 (आमंत्रण सूचना संख्या 60/2022-23 एवं प्रमंडल-2 आमंत्रण सूचना संख्या 75/2022-23) के मातहत लगभग 11 करोड़ का दैनिक साफ-सफाई का टेंडर 27 मार्च को होगा.
इसमें 31 ग्रुप हैं. ये सभी टेंडर उन्हीं को हासिल होंगे जो पिछले 22 वर्षों से काम कर रहे हैं. नये लोगों को अवसर नहीं मिलेगा. नये संवेदक को जटिल नियम व कानून लगाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है, वर्ष 2023 के कार्यों की ये सिर्फ शुरुआत है. इस संदर्भ में जब उन्होंने भवन-1 के कार्यपालक अभियंता अखिलेश कुमार से पूछा तो उन्होंने कहा कि जो करना है, कर लें. सीधा सीएमओ के यहां से उनका संपर्क है. आप कुछ नहीं कर पाओगे. आप ठेकेदार श्यामल को जानते हैं. उनकी और हम सबकी पकड़ मुख्य सचिव तक है.
आरटीआई की भी सुनवाई नहीं
आलोक दूबे के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब इस विभाग की अनियमितताओं को लेकर आवाज नहीं उठाई गयी हो. उन्होंने कई बार आन्दोलन भी किया है. आरटीआई के माध्यम से जानकारी भी मांगी थी पर आजतक इसे उपलब्ध नहीं कराया गया. 22 वर्षों में भवन निर्माण विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की सूची अब जल्द ही ईडी एवं मुख्यमंत्री को वे सौंपेंगे. इसमें वे लोग भी शामिल हैं जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं. जरूरत के मुताबिक मोरहाबादी स्थित कार्यालय के समक्ष चरणबद्ध तरीके से आन्दोलन भी किया जायेगा.
दूबे के मुताबिक 22 वर्षों में अगर देखा जाए तो 5 से 7 ही संवेदक हैं जो पूरे बजट का 80 प्रतिशत काम करते हैं. इनका गठजोड़ इतना मजबूत है कि ये जो चाहते हैं, विभाग में नीचे से लेकर ऊपर तक वही होता है. नये संवेदक को तो विभाग में प्रवेश ही नहीं मिलता. टेंडर के पहले काम समाप्त हो जाता है. अगर कोई संवेदक गलती से टेंडर डाल दिया तो उसे वापस कराया जाता है. नये संवेदक रजिस्ट्रेशन का कागज लेकर घूमते रह जाते हैं. आलोक दूबे के मुताबिक टेक्नोक्रेट्स के आगे ब्यूरोक्रेसी कहीं नहीं है. इनका साम्राज्य पूरे देश में फैला हुआ है. बड़े बड़े महानगरों में विभिन्न संस्थानों में झारखण्ड के इंजीनियर का पैसा लगा हुआ है. इसके पुख्ता प्रमाण भी हैं जो ईडी को उपलब्ध कराये जाएंगे. इंजीनियर अखिलेश कुमार से इस मामले पर पक्ष लेने को न्यूज विंग ने फोन किया पर संपर्क नहीं हो सका. बात होने पर उनका भी पक्ष रखा जाएगा.




