
New Delhi: पांच में से चार राज्यों में जीत हासिल कर भाजपा व भाजपा समर्थक आह्लादित हैं. मगर, इससे भी बड़ी खुशी आम आदमी पार्टी को मिली है. वजह यह है कि फिलहाल देश में भाजपा व कांग्रेस के बाद आप ही ऐसी पार्टी है जिसकी एक से अधिक राज्य में सरकार में है. देश में सपा, बसपा, राजद, टीएमसी जैसी बड़ी क्षेत्रीय पार्टियां हैं जिनकी कभी भी एक साथ दो राज्यों में सरकार नहीं रही है. यह अलग बात है कि इन दलों में से कुछ मौकों पर एक राज्य में सरकार होने के साथ दूसरे राज्य की सरकार में शामूलियत रही है. अब कहा जा सकता है कि फिलहाल कांग्रेस के बाद विपक्ष की सबसे मजबूत पार्टी आप बन गई है.
आप में पंजाब में प्रचंड बहुमत पाने के साथ ही गोवा में खाता भी खोला. गोवा में दो सीटों पर पार्टी प्रत्याशी जीते. पार्टी गठन के नौ साल में यह सफलता हासिल कर पार्टी ने जता दिया है कि पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल मतदाताओं का नब्ज पकड़ना जानते हैं. अब पार्टी राष्ट्रीय फलक पर छाने की कोशिश अवश्य करेगी. मौजूदा दौर में देखा जाए ममता बनर्जी व चंद्रशेखर राव विपक्ष का चेहरा बनने की कोशिश में जुटे हैं. अब अरविंद केजरीवाल साथ लिए बगैर इन दोनों के लिए आगे बढ़ना थोड़ा कठिन होगा.
राज्यों में सरकार के आधार पर दलों की हैसियत आंके तो आप कांग्रेस के बराबर खड़ी हो गई है. पंजाब की सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस की सरकार केवल राजस्थान व छत्तीसगढ़ दो राज्यों में रह गई है. आप की भी सरकार दो राज्यों दिल्ली व पंजाब में हो गई है. इस लिहाज से देखें तो विपक्ष में आम आदमी पार्टी के रुतबे में जोरदार इजाफा हुआ है.
जाहिर है अब आम आदमी पार्टी की नजर राष्ट्रीय पार्टी बनने पर होगी. इसके लिए चार राज्यों में छह प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करना जरूरी होता है. आप को दिल्ली, पंजाब और गोवा में छह फीसदी वोट मिल चुका है. बस एक और राज्य में छह फीसदी वोट हासिल करने की जरूरत है. मौजूदा परिदृश्य में यह हासिल करना आप के लिए मुश्किल नहीं होगा, बस जरूरत है कि किसी राज्य में विधानसभा चुनाव हो.




