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महिला उद्यमी समय के साथ गुणवत्ता में बदलाव करें, लोगों की पसंद का रखें ख्याल : अजय तिर्की

Ranchi : महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से शनिवार को रांची में ई-हाट और महिला कोष पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का आयोजन कैपिटोल हिल में किया गया. मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अपर सचिव अजय तिर्की ने कहा कि झारखंड में ई-हाट से जुड़कर महिलाएं काफी अच्छा कर रही हैं, लेकिन जरूरी है कि समय के साथ गुणवत्ता बढ़ायी जाये. उन्होंने बताया कि राज्य में महिला उद्यमियों की संख्या मात्र 15 से 17 प्रतिशत है, जबकि अन्य राज्यों में इनकी प्रतिशतता 40 तक है. ऐसे में राज्य काफी पीछे है. उन्नतशील समाज की स्थापना के लिए जरूरी है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़े. उन्होंने कहा कि राज्य में क्षमता और संसाधन अधिक हैं, लेकिन जानकारी के आभाव में लोग योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते. ई-हाट मंत्रालय की एक पहल है, जिसके जरिये महिला उद्यमियों की बनायी वस्तुओं को विदेशों में भी खरीदा जा रहा है.

सौंदर्यीकरण पर ध्यान दें

अजय तिर्की ने कहा कि राज्य में बांस की वस्तुएं काफी बनायी जाती हैं. जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में बांस की वस्तुओं का उत्पादन अधिक होता है. लेकिन, अभी भी राज्य में बांस की मोटी छालों का ही इस्तेमाल किया जाता है, जबकि दूसरे राज्यों में देखा जाता है कि वहां बांस के पतले रेशों का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में ये समझना होगा कि समय के साथ वस्तुओं की गुणवत्ता में बदलाव किया जाये. लोगों की पसंद के अनुसार रंगों का इस्तेमाल करें.

गांवों में प्रॉफिट बढ़ाया जाये

ई-हाट आउटरीच समिति की अध्यक्ष डॉ नंदिनी आजाद ने इस दौरान कहा कि साउथ और नॉर्थ के राज्यों में काफी अंतर है. राज्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां जंगलों में लोग रहते हैं. ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि गांवों में रहनेवाली महिलाओं को भी ई-हाट और महिला कोष से जोड़ा जाये. उन्होंने कहा कि जरूरी है कि इन स्कीमों के तहत गांवों के लोगों को प्रॉफिट अधिक मिले. इसके लिए स्कीम में कुछ बदलाव किया जाना चाहिए.

स्कीमों में होगा बदलाव

कार्यशाला के दौरान उद्यमियों की समस्या सुनने के बाद मंत्रालय के अपर सचिव अजय तिर्की ने कहा कि राज्य में आदिम जनजातीय महिलाएं हैं, जिन्हें इन सबकी जानकारी नहीं होती. इसके कारण उन्हें लाभ नहीं मिल रहा. इसके लिए ई-हाट और महिला कोष दोनों स्कीमों में बदलाव किया जायेगा.

ये थे मौजूद

महिला एवं बाल विकास विभाग झारखंड के मुख्य सचिव अमिताभ कौशल, निदेशक मनोज कुमार, मनोज कुमार आचार्जी, पी. अनंत, मंजू कालरा, किरण कुमारी समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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