
Ranchi: वायदा था खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने का. उन्होंने प्रोत्साहन राशि देने का. लेकिन अब हाल ये है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य का नाम रौशन कर चुकीं बेटियां कर्ज में डुबी हैं. कर्ज उस एशियाई पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में शामिल होने का, जिसमें परिवार और रिश्तेदारों से कर्ज लेकर ये उसमें शामिल हुई थीं. 16 सितंबर 2018 को एशियाई पावर लिफिटंग प्रतियोगिता में शामिल होने रांची पंडरा की अंजनी बारी, जमशेदपुर की राजलक्ष्मी सिंह और बड़ा घाघरा कुसई की मनीषा एक्का दुबई गयी थीं. वहां मनीषा एक्का ने गोल्ड, अंजनी बारी ने ब्रांउज और राजलक्ष्मी सिंह ने सिल्वर मेडल प्राप्त किया. जिससे देश दुनियाभर में राज्य का नाम हुआ. लेकिन अब जो इन लड़कियों की स्थिति है वो बस इतनी है कि किसी तरह ये कर्ज चुका लें.
रिश्तेदारों से लिये थे कर्ज
अंजनी बारी ने जानकारी दी कि प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए खेल विभाग से कई बार सहायता की अपील की. लेकिन विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर रिश्तेदारों से कर्ज लिया और प्रतियोगिता में शामिल हुई. अंजनी ने बताया कि झारखंड पावर लिफ्टिंग फेडरेशन के अध्यक्ष टिंकु लाल शाहदेव ने अंजनी और मनीषा को 50-50 हजार रुपये फंड से दिलवाये थे. वहीं राजलक्ष्मी ने परिजनों से कर्ज लिया. लेकिन तीनों लड़कियों के आवागमन का खर्च लगभग 1 लाख 30 हजार आया. ऐसे में तीनों ने रिश्तेदारों से कर्ज लिया. अब रिश्तेदार इनसे कर्ज मांग रहे हैं. और इनके पास देने के लिए पैसा नहीं है.
मंत्री ने कहा था वापसी पर देंगे खर्च
खिलाड़ियों ने बताया कि जाने के पहले मंत्री अमर कुमार बाउरी से कई बार मुलाकात की गयी. तब उन्होंने कहा था कि खेल कर आयें. वापसी के बाद विभाग की ओर से सारे पैसा दे दिया जायेगा. इन खिलाड़ियों की वापसी के चार माह हो चुके हैं लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोई राशि निर्गत नहीं की गयी है.
29 सितंबर को हुई थी मंत्री से मुलाकात
27 सितंबर 2018 को खिलाड़ी दुबई से वापस आयीं. जिसके बाद 29 सितंबर को खिलाड़ियों ने मंत्री अमर कुमार बाउरी से मुलाकात की. इस दौरान भी खिलाड़ियों ने अपनी समस्या मंत्री के पास रखी. अंजनी के अनुसार, तब मंत्री ने कहा था कि खेल निदेशक इस संबध में कार्यरत हैं. लेकिन अब विभाग की ओर से इस संदर्भ में कुछ नहीं किया जा रहा है.
कम से कम फोर्थ ग्रेड नौकरी ही दे सरकार
अंजनी ने कहा कि सरकार ने खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की बात कहीं थी. जब प्रयिोगिता में शामिल होने गये थे तब यही लगा भी कि कुछ काम मिल जायेगा. उन्होंने कहा कि कर्जदार रोज घर आते हैं. पिता की आमदनी इतनी नहीं है कि कर्ज दें. ऐसे में अब लग रहा है कि किसी तरह सरकार फोर्थ ग्रेड की ही नौकरी दे. कम से कम कर्ज तो चुका दें. उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने के बाद भी खेल जारी रहेगा. लेकिन पहले कर्ज तो चुका लें.
मंत्री और अधिकारियों ने नहीं उठाया फोन
इस संबध में कई बार मंत्री अमर बाउरी से बात करने की कोशिश की गयी लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया. इसके साथ ही विभागीय सचिव राहुल शर्मा से भी बात करने की कोशिश की गयी लेकिन उनका फोन नहीं लगा.
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