
NewDelhi : केंद्र की मोदी सरकार द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर रूठे वोटरों को मनाने के लिए एक फरवरी को लेखानुदान के बजाय पूर्ण बजट पेश करने के संकेत है. भाजपा नेताओं की मानें तो ऐसा ही होने जा रहा है. इस खबर से कांग्रेस में हलचल है. इसे लेकर कांग्रेस ने भाजपा को चेताया है कि वह संसदीय परंपरा का उल्लंघन करने की कोशिश न करे. भाजपा नेताओं के अनुसार लेखानुदान (वोट ऑन अकाउंट) किसी पूर्ण बजट की ही तरह होता है और सरकार को किसानों, ग्रामीण क्षेत्र और मध्यवर्ग के लिए रियायतों की घोषणा से पीछे नहीं हटना चाहिए. पार्टी सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव से पूर्व पेश किये जाने वाले बजट के लिए लेखानुदान शब्द का इस्तेमाल बेवजह है और इसमें तमाम तरह की घोषणाएं की जानी चाहिए, जो पूर्ण बजट में की जाती हैं. हालांकि टैक्स में किसी भी प्रकार की छूट की घोषणा मुश्किल होगी, लेकिन 2019 के चुनाव में जिन वोटरों पर भाजपा की निगाह टिकी है, उनके लिए राहतों की घोषणाएं की जानी चाहिए. इस संबंध में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि किसी भी बजट का मतलब पूर्ण बजट होता है; एक फरवरी को पेश होने वाला बजट एक नियमित बजट की तरह ही होने की उम्मीद है. बता दें कि भाजपा द्वारा दलितों, ओबीसी और आदिवासियों को लुभाते हुए व्यापारियों और ऊंची जाति के अपने मूल वोटरों का दिल फिर से जीतने का प्रयास किया जा रहा है.
कांग्रेस की सरकार पूर्व में इस परंपरा का उल्लंघन कर चुकी है
भाजपा की मंशा की जानकारी मिलते ही विपक्षी कांग्रेस मौजूदा केंद्र सरकार को लेखानुदान की परंपरा का पालन करने की चेतावनी दे रही है. वहीं, भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस की सरकार पहले ही इस परंपरा का उल्लंघन कर चुकी है, इसलिए वह भाजपा को इस बारे में शिक्षा न दे. खबरों के अनुसार भाजपा ने सरकार को किसानों के लिए रियायतों का सुझाव दिया है, जिसकी रूपरेखा पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेने वाले है. हालांकि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हाल में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस द्वारा किसानों की कर्जमाफी की घोषणा के जरिये जीत हासिल करने के बावजूद भाजपा कर्जमाफी के पक्ष में नहीं है.
लेकिन किसानों के लिए अन्य रियायतों की घोषणा किये जाने की उम्मीद है. जान लें कि किसानों को उनकी उपज की सही कीमत नहीं मिलने के कारण भाजपा को उनका कोपभाजन बनना पड़ा है. पिछले बजट में सरकार ने किसानों को फसल लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने की घोषणा की थी, लेकिन इसे प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सका है. वर्तमसन में विधानसभा चुनावों में ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है.
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