

झारखंड निर्वाचन आयोग
झारखंड में पंचायत चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए चुनावी खर्च का हिसाब देना अनिवार्य है। निर्धारित समय सीमा में खर्च का ब्योरा जमा नहीं करने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त कार्रवाई की है। चुनावी खर्च का लेखा-जोखा नहीं देने पर संबंधित प्रत्याशियों को अगले तीन वर्षों तक पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है। हालिया कार्रवाई में रामगढ़ और जामताड़ा जिले के कुल 14 प्रत्याशियों पर तीन साल की पाबंदी लगाए जाने की खबर सामने आई है।
2022 के पंचायत चुनाव से जुड़ा मामला
जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई वर्ष 2022 में हुए झारखंड पंचायत चुनाव से संबंधित है। चुनाव लड़ने के बाद कुछ प्रत्याशियों ने निर्धारित समय सीमा में अपने निर्वाचन व्यय का विवरण राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष जमा नहीं किया था।
जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने संबंधित प्रत्याशियों के खिलाफ कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक, रामगढ़ जिले के 10 और जामताड़ा जिले के चार प्रत्याशियों को तीन वर्षों तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है।
खर्च का विवरण जमा करना अनिवार्य
राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, पंचायत चुनाव में प्रत्येक प्रत्याशी को चुनावी खर्च का सही और पूरा हिसाब रखना होता है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर निर्वाचन व्यय का विवरण संबंधित निर्वाचन अधिकारी के पास जमा करना अनिवार्य है।
यदि कोई प्रत्याशी निर्धारित समय पर खर्च का लेखा प्रस्तुत नहीं करता है और आयोग को उसकी चूक के लिए उचित कारण नहीं मिलता है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
प्रत्याशियों को दिया जाता है जवाब का अवसर
चुनावी खर्च का विवरण जमा नहीं करने के मामलों में संबंधित प्रत्याशियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जा सकता है। यदि प्रत्याशी अपनी विफलता के लिए संतोषजनक कारण नहीं बताते हैं, तो आयोग नियमानुसार प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई कर सकता है।
पारदर्शी चुनाव व्यवस्था की दिशा में कदम
राज्य निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई को चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग का उद्देश्य है कि चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशी निर्धारित नियमों का पालन करें और चुनावी खर्च का पूरा विवरण समय पर जमा करें।
इस कार्रवाई से पंचायत चुनाव में भाग लेने वाले उम्मीदवारों के लिए स्पष्ट संदेश है कि चुनावी खर्च का हिसाब देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया है। नियमों की अनदेखी करने पर उन्हें चुनाव लड़ने से तीन साल तक वंचित होना पड़ सकता है।




