

निशा भगत के पिता
आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। बेटी की मौत के बाद उनके पिता हंदू भगत ने पिठोरिया थाना पहुंचकर लिखित आवेदन दिया है। आवेदन में अजय तिर्की, ज्योत्सना केरकेट्टा समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। पिता ने अपनी बेटी की मौत के पीछे कथित साजिश और लंबे समय से हो रही मानसिक एवं सामाजिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है।
मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का आरोप
हंदू भगत का आरोप है कि निशा भगत को लंबे समय से मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान किया जा रहा था। शिकायत के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनके चरित्र को लेकर आपत्तिजनक बातें कही गईं और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
पिता ने यह भी आरोप लगाया है कि जमीन के कारोबार से जुड़े कुछ लोगों और अन्य व्यक्तियों की ओर से निशा को परेशान किया जाता था। उन्होंने पुलिस से इन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच करने की मांग की है।
अजय तिर्की और ज्योत्सना केरकेट्टा समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग
अपने आवेदन में हंदू भगत ने अजय तिर्की और ज्योत्सना केरकेट्टा का नाम लेते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच करने का आग्रह किया है।
पिता ने निशा भगत के निधन से पहले सोशल मीडिया पर जारी किए गए वीडियो और बयानों को जांच का आधार बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि वीडियो में जिन लोगों का उल्लेख किया गया है, उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
6 नवंबर को किराये के मकान में मिला था शव
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 6 नवंबर को पिठोरिया थाना क्षेत्र स्थित किराये के मकान में निशा भगत का शव मिला था। इससे पहले वह फेसबुक लाइव पर आई थीं और अपनी परेशानियों को साझा किया था। लाइव वीडियो में उन्होंने कथित प्रताड़ना, जमीन कारोबार से जुड़े लोगों और पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।
निशा भगत की मौत के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। नगड़ी चेकपोस्ट के पास युवाओं द्वारा विरोध प्रदर्शन कर सीबीआई जांच की मांग किए जाने की भी खबर सामने आई है।
पुलिस जांच पर टिकी नजरें
पिता की शिकायत के बाद अब मामले में पुलिस की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। जिन लोगों के नाम आवेदन में शामिल हैं, उनके खिलाफ आरोपों को फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
निशा भगत की मौत के मामले में सच्चाई सामने लाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग के बीच अब पुलिस जांच के निष्कर्षों पर सबकी नजरें टिकी हैं।




