
Ranchi: झारखंड में गर्मी चरम पर है. अधिकांश जिलों का तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. वहीं, कुछ जिलों में दोपहर बाद हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश भी होती है. लेकिन बढ़ती गर्मी और हल्की सी बारिश ने बिजली आपूर्ति की पोल खोल दी है. 20 जून तक मानसून भी आने वाला है, इसके पहले ही लोकल फॉल्ट के नाम पर घंटों बिजली गुल रहती है. जिन इलाकों में बारिश होती है, वहां आंधी से सुरक्षा के लिये बिजली काटी जा रही है. जो औसतन पांच घंटे तक की होती है. जबकि पिछले छह साल में झारखंड बिजली वितरण निगम ने बिजली मरम्मत और वितरण संसाधनों पर लगभग 3400 करोड़ रूपये खर्च कर दिये. राशि झारखंड संपूर्ण बिजली अच्छादन योजना के तहत खर्च की गयी. जिसका उद्देश्य बिजली संसाधनों को सुगम और मजबूत बनाना है. जिससे आंधी बारिश या अधिक लोड से होने वाली लोकल फॉल्ट कम की जा सकें. बता दें राज्य में तेज गर्मी के दौरान घंटों लोड शेडिंग का सामना लोगों को करना पड़ रहा है. निगम का दावा है कि पर्याप्त बिजली है. लोकल फॉल्ट के कारण बिजली कट रही है.
किन किन क्षेत्रों में किया गया खर्च: पिछले छह सालों में 3400 करोड़ राशि का खर्च अलग अलग बिजली संसाधनों में किया गया.वितरण निगम की मानें तो योजना के तहत काम लगभग पूरा हो चुका है. जिसकी रिपोर्ट केंद्र को भी भेज दी गयी है. इसके तहत 33 और 11 केवीए के 117 सबस्टेशन बनाए जाने थे. जिनमें 112 पूरा हो चुका है. 196 पुराने सबस्टेशन को अपग्रेड किया गया. 2192.43 किमी में से 2169.59 किमी 33 केवीए की नई लाइन का निर्माण पूरा. 33 केवी की कुल 1602.80 किमी लाइन का अपग्रेडेशन पूरा. 11 केवीए लाइन एचटी एबी और 11 केवी लाइन का अपग्रेडेशन पूरा. 6447 नये डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर लगाये गये. 1207 खराब डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर बदले गये. 8316.65 किमी नयी एलटी लाइन और एबी केबल बिछायी गयी. समेत अंडरग्राउंड केबलिंग का कार्य जारी है. केंद्र ने भी जारी किया है फंड: निगम की ओर से 3400 करोड़ की राशि भले साल 2017 से 2023 में पिछले महीने तक खर्च की गयी. इसके बाद भी केंद्र सरकार ने साल अन्य योजना के तहत राज्य के लिये 3200 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है. ये राशि भी बिजली मेंटनेंस पर खर्च की जानी है. राशि रिवैम्प डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम के तहत खर्च की जायेगी. इस राशि से भी लाइन मेंटनेंस, ट्रांसमिशन लाइन बनाने समेत अन्य काम किया जायेगा.
क्या है वर्तमान स्थिति: राज्य की बात करें तो यहां शहरी इलाकों में औसतन पांच से छह घंटे की बिजली कटौती हो रही है. ग्रामीण इलाकों में ये कटौती नौ से दस घंटे तक की है. वहीं, डीवीसी इलाकें में बिजली कटौती 12 घंटे तक पहुंच गया है. निगम ने भीषण गर्मी में बार बार ये दावा किया है कि बिजली संकट लोकल फॉल्ट के कारण हो रही है. जबकि एक बड़ी राशि मेंटनेंस पर खर्च की जाती है. वहीं, मॉनसून शुरू होने के बाद इस साल भी राज्य में बिजली संकट गंभीर होगी. क्योंकि अभी भी राज्य में अंडरग्रांउड केबलिंग पूरी नहीं है.




