
Nikhil Kumar
Ranchi: राज्य में आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्त अधिकारियों व कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के साथ ही उनके साथ हो रहे शोषण को देखते हुए सरकार एक नीति तैयार करने पर विचार कर रही है. मुख्य सचिव के आदेश के बाद वित्त विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है. बाह्य स्रोतों से नियुक्त सारे कर्मचारियों का ब्योरा तैयार किया जा रहा है. विभागीय सचिव अजय कुमार सिंह ने सभी विभागों को बफशीट लिखा है और आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से बाह्य सोर्स से नियुक्त कर्मियों का पूरी विवरणी (प्रोफेसशनल सर्विस,जिसमें होमगार्ड भी शामिल) मांगी है. यह विवरणी कर्मियों के नाम के साथ देने को कहा है ताकि उनकी पूरी जानकारी उपलब्ध हो सके. वित्त विभाग ने एक फॉर्मेट तैयार कर सभी विभागों को भेजा है. इसमें कर्मी का पदनाम, कर्मियों की संख्या, कार्यरत अवधि, मासिक परिलब्धि, बाह्य स्रोत के आधार पर सेवा प्राप्त करने के निमित पद सृजित है अथवा नहीं, स्वीकृति सक्षम स्तर से प्राप्त की गयी है की नहीं, यदि स्थायी रूप से रखने की आवश्यकता है, तो विभागीय आवश्यकता आधारित पदों की संख्या का ब्योरा शीध्र देने को कहा गया है.
विभाग अगर इन कर्मियों की आवश्यकता लंबे समय तक होने को बतायेगा तो सरकार उन्हें नियमित करने पर भी विचार कर सकती है, पदों का सृजन भी किया जा सकता है. बेहतर नीति तैयार कर कर्मचारियों को राहत दिया जायेगा। झारखंड हाइकोर्ट ने भी 2021 में रंजन प्रसाद गुप्ता, बनाम झारखंड सरकार एवं अन्य के मामले में बाह्य स्रोत के माध्ण्यम से सेवा प्राप्त करने के संबंध में अंतिरिम न्यायादेश पारित कियाग या है, जिसके आलोक में नीतिगत निर्णय सरकार को लेना है. पूरे मामले पर नीति तैयार कर कैबिनेट की स्वीकृति ली जायेगी.
जैप आइटी व दूसरी एजेंसियों से होती है नियुक्ति
राज्य के विभिन्न विभागों में नियमित नियुक्ति के अलावा संविदा पर नियुक्ति व बाह्य स्रोत से नियुक्ति की जा रही है. नियमित नियुक्ति आयोग के जरिये की जाती है. जबकि संविदा पर नियुक्ति विभाग स्वीकृत पद के विरूद्ध करता मासिक मानदेय देकर करता है. वहीं, कुछ अनियमित नियुक्त्यिां भी हुई हैं जिसे नियमितीकरण करने या समाप्त करने पर कार्रवाई चल रही है. वहीं, विभाग कुछ नियुक्त्यिां आउटसोर्स के जरिये कराती है जिसमें आइटी विशेषज्ञ सहित अन्य पदों पर जैपे आइटी के माध्यम से सूचीबद्ध एजेंसियों के दवारा नियुक्ति की जाती है. वहीं, कुछ विभाग से सूचीबद्ध एजेंसी भी बाह्यस्रोत से नियुक्ति करती है. यह देखा जा रहा है कि आउटसोर्स पर जितनी भी नियुक्ति हुई है उसमें कर्मियों का शोषण हो रहा है. उचित मानदेय नहीं मिलने के अलावा सुविधा इत्यादि भी नहीं दी जाती है. असुरक्षा भी एक बड़ा कारण है. इसके अलावा काम के प्रति जवाबदेही भी इनकी कम है. इसी बीच हेल्थ विभाग में भी एक मामला आया और इसकी शिकायत मुख्य सचिव तक गयी है जिसके बाद सरकार के स्तर पर आउटसोर्स कर्मियों के बारे में नीति तैयार करने का निर्णय हुआ.
इन कर्मियों का ब्यौरा देना है
विभिन्न विभागों में आउटसोर्स एजेंसी के आधार पर कार्यरत कर्मियों जिसमें कंप्यूटर ऑपरेटर, डाटा इंट्री ऑपरेटर, सहायक प्रोग्रामर, अमीन, आदेशपाल, चालक, सफाई कर्मी आदि के बारे में विहित प्रारूप में विभागवार सूचना नाम सहित मांगा गया है. बता दें कि विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में इनकी नियुक्ति की गयी. राज्य से प्रखंड स्तर तक आउटसोर्स पर कर्मचारी काम कर रहे हैं.




