
Ranchi: झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि बाबूलाल मरांडी ने छह विधायकों के खरीद-फरोख्त को प्रमाणित करती चिट्ठी सार्वजनिक कर झारखंड की जनता के सामने बीजेपी का असली चेहरा उजागर कर दिया है. जेवीएम पहले से दावा करती रही है कि ये विधायक समाजसेवा के लिए बीजेपी में नहीं गये बल्कि पैसे और पद के लालच में गए हैं.
बीजेपी के 32 विधायक नकारा थे क्या- योगेन्द्र प्रताप
जेवीएम प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रवीन्द्र राय द्वारा लिखा पत्र को बीजेपी ने अपने कृत्य से साबित कर दिया. उन्होने कहा कि बीजेपी ने झाविमो से गये छह विधायकों में से दो को मंत्री पद व तीन को बोर्ड-निगम में जगह दी, सवाल उठता है कि बीजेपी के 32 विधायक जो चुनाव जीत कर आये थे वे सभी नकारा ही थे क्या ? अब इस पत्र के सार्वजनिक होने से पैसे के खेल का भी झाविमो द्वारा किया जा रहा दावा प्रमाणित हो गया.
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‘रविन्द्र राय अपना दामन बचाने के लिए कह रहे जांच की बात’
जेवीएम प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष केवल जनता को गुमराह करने के लिए सक्षम जांच एजेंसी से जांच करने की बात कह रहे हैं. प्रदेश में उनकी ही सरकार है, अविलंब सीबीआई जांच की अनुशंसा सरकार को करनी चाहिए. अब तक बीजेपी द्वारा सीबीआई जांच की अनुशंसा नहीं करना ही इस पत्र की सत्यता का पहला प्रमाण है. दम है तो सरकार आज ही सीबीआई जांच की अनुशंसा करे, दूध का दूध व पानी का पानी हो जायेगा.
पत्र फर्जी है तो सीबीआई जांच से क्यों भाग रही है रघुवर सरकार ?
जेवीएम ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता बड़े दावे से कह रहे हैं कि पत्र फर्जी है. अगर पत्र फर्जी है तो जांच में तो सारी बातें सामने आ ही जाएंगी. पत्र अगर फर्जी है तो बीजेपी के कुनबे में इतनी हड़बड़ाहट व घबराहट क्यों है? झाविमो की मांग बस इतनी ही है कि ऐसा एक गंभीर पत्र सामने आया है, इसमें उल्लेखित बिन्दुओं की सत्यता की सीबीआई से जांच होनी चाहिए.
घबरा गई है बीजेपी, हकला रहे हैं बीजेपी प्रवक्ता- जेवीएम
योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि बीजेपी की हालत खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली हो गई है. अपनी असलियत सामने आने के बाद भाजपा नेता खुद पगलाये व बौखलाए दिख रहे हैं. बीती रात को तो एक महामंत्री इतने हकलाये हुए थे कि उनकी जुबां से ठीक से बोली नहीं फूट रही थी. जनता सब देख रही है. लोकतंत्र की गरिमा को तार-तार करने वाले लोग कम-से-कम बाबूलाल जी को तो राजनीतिक गरिमा व सुचिता का उपदेश न दें.
‘पत्र सामने आते ही अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने लगे बीजेपी नेता’
जेवीएम प्रवक्ता ने कहा कि रविन्द्र राय व उनके सहयोगी जिस प्रकार अमर्यादित शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं, वह उनके मानसिक दिवालिएपन का प्रतीक है. बाबूलाल जी इतनी नाइंसाफी के बाद भी कभी मर्यादा नहीं खोये, जबकि भाजपा नेता चोरी व सीनाचोरी की कहावत चरितार्थ करते हुए अमर्यादित शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं. भाजपा नेता व बाबूलाल जी में यही अंतर है. जहां तक कोर्ट व मान-हानि की बात है तो बीजेपी को किसने रोका है ? इस प्रकार की गीदड़भभकी से तो कम-से-कम बाबूलाल डरने वाले नहीं हैं. अकेला एक बाबूलाल पूरी बीजेपी पर भारी हैं, क्योंकि इनके पास सच्चाई की ताकत है और बीजेपी झूठ की खेती कर रही है.

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