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New Delhi, 23 November : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर पहली बार सीधा हमला बोलते हुए पार्टी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने आज सरकार एवं संगठन चला रही व्यवस्था को ‘‘एक आदमी की सेना’’ और ‘‘दो आदमी का शो’’ करार दिया. पटना साहिब से लोकसभा सांसद सिन्हा ने मोदी सरकार पर करारा वार करते हुए कहा कि इसके मंत्री ‘‘खुशामदीदों की टोली’’ हैं, जिनमें से 90 फीसदी को कोई नहीं जानता.
एक कार्यक्रम में अपने ‘दिल की बात’ बताते हुए सिन्हा ने कहा, ‘‘किसी और ने ‘मन की बात’ पेटेंट करा रखी है . आजकल ऐसा माहौल है कि या तो आप एक शख्स का समर्थन करें या देशद्रोही कहलाने के लिए तैयार रहें.’’ मोदी सरकार की नीतियों की अक्सर आलोचना करने वाले सिन्हा आज माकपा महासचिव सीताराम येचुरी और जदयू के बागी नेता शरद यादव सहित विपक्ष के कई शीर्ष नेताओं के साथ मंच साझा करते हुए जमकर बरसे.
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आजकल हो ये रहा है कि ‘ना जियूंगा, ना जीने दूंगा’
भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी के बहुचर्चित नारे ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ पर कटाक्ष करते हुए सिन्हा ने कहा, ‘‘आजकल हो ये रहा है कि ‘ना जियूंगा, ना जीने दूंगा.’ जदयू के बागी सांसद अली अनवर की किताब के विमोचन के अवसर पर सिन्हा ने अपने विरोधियों के इस दावे को खारिज कर दिया कि वह मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज हैं. उन्होंने कहा कि उनकी कभी ऐसी आकांक्षा नहीं थी.
मोदी सरकार के मंत्रियों का मजाक उड़ाते हुए सिन्हा ने कहा, ‘‘उनमें से 90 फीसदी को कोई नहीं जानता . उन्हें भीड़ में कोई नहीं पहचानेगा. वे खुशामदीदों की टोली हैं. वे वहां कुछ बनाने के लिए नहीं हैं, बस बने रहने की कोशिश में लगे हैं.’’ सिन्हा नोटबंदी और जीएसटी जैसे सरकार के आर्थिक फैसलों पर बोलने के कारण उनकी आलोचना करने वालों पर भी बरसे.
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मंत्रियों पर व्यंग्य
संभवत: केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी और प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यदि एक वकील वित्त मंत्री बन सकता है, एक टीवी अदाकारा मानव संसाधन विकास मंत्री बन सकती है और एक चाय वाला फिर मैं इन मुद्दों पर क्यों नहीं बोल सकता ?’’ गौरतलब है कि स्मृति पहले मानव संसाधन विकास मंत्री थीं.
सिन्हा ने आरोप लगाया, ‘‘बुद्धिजीवियों की हत्या हो रही है और अब तो जजों को भी मारा जा रहा है.’’ भाजपा सांसद ने कहा कि इन मुद्दों को मीडिया में पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है, क्योंकि ‘जनतंत्र’ पर ‘धनतंत्र’ हावी हो रहा है.




