
Ranchi: सम्राट गिरोह का सुप्रीमो जयनाथ साहू पीएलएफआई के निशाने पर था. इस वजह से वर्षों से अंडरग्राउंड रह रहा था. मुख्यरूप से रांची, खूंटी, गुमला में सक्रिय रहे सम्राट गिरोह के सुप्रीमो जयनाथ साहू ने रांची सिविल कोर्ट में कमलेश बेहरा की अदालत में सोमवार को सरेंडर कर दिया. लापुंग थाना क्षेत्र के रहने वाले जयनाथ साहू की लंबे समय से पुलिस को भी तलाश थी. वर्ष 2014 में पुलिस गिरफ्त में आये पीएलएफआई के उग्रवादी जेठा कच्छप ने पुलिस के समक्ष खुलासा किया था कि मुझे बेहद अफसोस है कि मैं अपने मिशन को कामयाब नहीं कर सका. मेरा मिशन था सम्राट गिरोह के सुप्रीमो जयनाथ साहू की हत्या. मिशन अधूरा ही रह गया. उसने पुलिस को बताया कि जयनाथ साहू को मारने का टास्क उसे पीएलएफआइ सुप्रीमो दिनेश गोप ने दिया था. सम्राट गिरोह के सुप्रीमो जयनाथ साहू उस वक्त चर्चा में आया था. पीएलएफआइ के खूंखार जोनल कमांडर लापुंग थाना क्षेत्र के महुगांव निवासी करमा उरांव के पिता लोहरा उरांव की हत्या वर्ष 2000 में कर दी थी. पिता की हत्या का बदला लेने के लिये करमा पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप के संपर्क में आया था. करमा उरांव अप्रैल 2022 मंत पीएलएफआई का एरिया कमांडर करमा उरांव को खुंटी पुलिस ने नगड़ा जंगल से गिरफ्तार किया था. करमा उरांव पर 44 मामले दर्ज हैं. 18 साल से उग्रवादी गतिविधियों में शामिल था.
पीएलएफआई और सम्राट गिरोह में चलता था अदावत
पीएलएफआई एवं सम्राट गिरोह के बीच काफी समय तक अदावत से रांची खूंटी इलाके में दहशत का महौल था. इन दोनों गुटों के बीच वर्चस्व को लेकर वर्षो तक अदावत चली. हालांकि हाल के वर्षो से सम्राट गिरोह कमजोर हो गया. सम्राट गिरोह के सदस्य प्रदीप साहू के भाई दिलीप साहू की वर्ष 2013 में लापुंग इलाके में पीएलएफआई ने हत्या कर दी थी. वह सम्राट गिरोह की मदद करता था. प्रदीप ने भाई की हत्या का बदला लेने के लिए सम्राट गिरोह का दामन थामा. दोनों गुटों में खूनी संघर्ष से क्षेत्र में लोग आशंकित रहते थे. राज्य बनने के समय खूंटी और रांची के ग्रामीण इलाके में सम्राट गिरोह की तूती बोलती थी. लेकिन पीएलएफआई के गठन के बाद दोनों में वर्चस्व को लेकर खूनी खेल शुरू हो गया. सम्राट गिरोह कमजोर पड़ने से पीएलएफआइ का वर्चस्व बढ़ता गया.




