News Wing Giridih, 25 October: खुले में शौच मुक्ति की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए जिला प्रशासन अब मानवाधिकार का उल्लंघन करने लगी है. गिरिडीह के मनद्रमो ओडीएफ क्षेत्र में बुधवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. यहां नदी तट पर पुलिस बल के साथ मॉर्निंग फॉलोअप के लिए पहुंचे सरिया बीडीओ शशिभूषण वर्मा, दण्डधिकारी राजेश कुमार लिंडा समेत अन्य पदाधिकारियों ने खुले में शौच गए लोगों की जमकर क्लास ली, साथ ही सभी को कान पकड़ कर उठक बैठक करवाई. इस दौरान टीम ने खैराबाद, मंझलीटाड्, पचम्बा आदि गांवों का दौरा किया. सभी जगहों पर खुले में शौच जाने वाले लोगों से पोट्टी में मिट्टी डलवाया और उठक-बैठक करवाकर सभी को चेतावनी देकर छोड़ दिया. गौरतलब है कि मन्द्रमो पूर्वी भाग खुले में शौच मुक्त हो चुका है, लेकिन काफी संख्या में इस क्षेत्र के लोग अब भी शौच के लिए खुले में जाते हैं. हालांकि बुधवार की कार्रवाई में कई निर्दोष लोग भी सजा के भागीदार हो गए.
मॉर्निंग वॉक के लिए गये थे, बेवजह किया गया परेशान
भुक्तभोगी मुकेश रविदास ने कहा कि उन्हें और उन जैसे कई लोगों को नाहक की परेशान किया गया. उन्होंने बताया कि वे लोग मॉर्निंग वॉक के लिए गए थे, लेकिन खुले में शौच के आरोप लगाकर उन्हें प्रताडित किया गया है. मुकेश ने कहा कि स्थानीय लोग इस मामले को लेकर काफी भड़के हुए हैं.
क्या तर्क संगत है जबरिया अभियान को मूर्त रूप देने का रास्ता
अहिंसावादी गांधी जी के स्वच्छ भारत अभियान को धरातल पर लाने के लिए गिरिडीह जिले के हुक्मरान हिंसा का रास्ता अपना रहे हैं. वास्तव में खुले में शौच मुक्ति के लिए बदले वातावरण निर्माण करना होगा. माहौल बनाना होगा, तभी स्वच्छ भारत अभियान सरजमी पर उतर पायेगा. जबरिया अभियान को मूर्त रूप देने का रास्ता न ही तर्क संगत है और न ही न्याय संगत.




