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Ranchi, 20 October: सिमडेगा में मासूम संतोषी की मौत अगर मलेरिया से हुई थी, तो वहां के पीडीएस लाइसेंस धारी की लाइसेंस क्यों रद्द कर दी गयी. या ऐसा कौन सा तरीका अपना कर मलेरिया विभाग के एएनएम ने मलेरिया फैलाया जिससे संतोषी को मलेरिया हो गया और उसकी मौत हो गयी. सरकार को इस मामले में समझ नहीं आ रहा है कि वो क्या करे और क्या कहे. अपनी नाकामी को छिपाने के लिए सरकार तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है. सरकार के पास मामले को लेकर किसी तरह की कोई सही जानकारी ही नहीं है. ऐसा कहना है राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का. वो न्यूज विंग से खास बात-चीत में अपनी बातों को रख रहे थे.
डीसी खुद दोषी, तो कैसे कर सकते हैं जांच
बाबूलाल का कहना है कि 21 अगस्त और 1 सिंतबर को जनता दरबार में वहां की एक सामाजिक कार्यकर्ता तारामणी साहू ने डीसी को आवेदन देकर यह कहा था कि संतोषी के परिवार को राशन नहीं मिल रहा है. ऐसा दो बार हुआ जब तारामणी ने इस बात की जानकारी लिखित रूप से डीसी को दी. 28 सिंतबर को संतोषी की मौत भूख से हो जाती है. क्योंकि उसे पीडीएस से सरकारी राशन नहीं मिला था. प्रशासन की नींद बच्ची की मौत के बाद खुली. राशन कार्ड 10 अक्टूबर को बनाया गया. ऐसे में वहीं डीसी पूरे मामले की जांच रिपोर्ट कैसे बना सकता है, जिसने खुद ही उसे राशन देना बंद किया था. मामले की जांच दोषी उपायुक्त ने फर्जी तरीके से की है. मैं मांग करता हूं कि मामले की जांच एक दूसरी कमेटी करे.
पीडीएस सिस्टम दुरुस्त करे सरकार नहीं तो प्रदेश भर में होगा आंदोलन
बाबूलाल ने कहा कि सरकार ने 1000 दिन पूरे होने की खुशी में एक विज्ञापन छापा. जिसमें सूचना दी गयी कि राज्य भर में काफी संख्या में राशन कार्ड, पेंशन धारी और दूसरे लाभुकों के नाम को लिस्ट से हटा दिया गया है. इस काम को सरकार ने वाहवाही के रूप में सबके सामने रखा. जिसका नतीजा अब ये हो रहा है कि मासूमों की मौत हो रही है. अगर सरकार 15 नवंबर तक अपनी गलती को नहीं सुधारती है तो जेवीएम प्रदेश में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए सड़क पर उतरेगी.




