Akshay/Manish/Biru/Prakash
Ranchi, Ramgarh, Bokaro, 13 October :
ग्राहकगण कृपया ध्यान दें.
“झारखंड राज्य में मदिरा के व्यवसाय पर इने-गिने व्यापारिक संगठनों के एकाधिकार को समाप्त करने, उपभोक्ता को उनकी मांग के अनुसार युक्तियुक्त मूल्य पर शुद्ध एवं गुणवत्ता युक्त मदिरा उपलब्ध कराने एवं उत्पाद राजस्व में वृद्धि हेतु मदिरा के वितरण एवं थोक व्यवसाय के लिए राज्य बिवरेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड का गठन किया गया है.”
– ऐसे मूल्यवान वाक्य आपको झारखंड बिवरेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड का साइट खुलते ही दिखेगा. लेकिन, सच इन महान वाक्यों से कोसों दूर है. सच यह है कि शराब व्यवसाय में फिर से वही मनमानी शुरू हो चुकी है, जो पहले था. एकाधिकार खत्म होने की बजाय वो नए रूप में सामने आ रहा है. शराब दुकान पर शराब बेचने वाले मनमाने ढंग से ग्राहकों से पैसा लूट रहे हैं. और करोड़ों में अपनी जेब भर रहे हैं. अफसरों की जेब भी भर रहें हैं. तभी वह चुप हैं. इस मामले में विभाग के सीनियर अधिकारियों का मौन व्रत भी कई तरह के सवाल खड़ा करता है.
करीब 50 लाख रुपए की रोजाना अवैध वसूली
एक जुलाई से राज्य में सरकार खुद शराब बेच रही है. खुदरा दुकानों पर शराब बेचने के लिए दो कंपनियों को मैन पावर का जिम्मा दिया गया है. ये फ्रंटलाइन और शोमुख हैं. इन्हें के कर्मी सारे खेल को अंजाम दे रहे हैं. राज्य भर में सरकार ने शराब के करीब 550 खुदरा दुकान खोले हैं. newswing.com के रिएलिटी चेक में पाया गया है कि हर दुकानदार शराब को उसकी तय कीमत से ज्यादा पर बेचता है. एक 180 एमएल की बोतल पर 5-7 रुपए. एक 375 एमएल की बोतल पर 10-15 रुपए और 750 एमएल की बोतल पर 20-25 रुपए ज्यादा वसूले जा रहे हैं. ऐसे में शहरी दुकान और ग्रमीण दुकान एवरेज निकाला गया तो चौकाने वाले आंकड़े सामने आए. हर दिन करीब 50 लाख की अवैध कमायी ये दोनों कंपनी के कर्मी मिलकर कर रहे हैं. इतना बड़ा गोरखधंधा हो रहा है और विभाग के अधिकारी कहते हैं कि उन्हें पता नहीं है. उनक चुप्पी कई ओर इशारा करती है.
कमायी के हिसाब को ऐसे समझे
– शहरी के किसी भी दुकान में एक दिन में 400-500 बोतल 180 एमएल की बेची जाती है.
– 250-300 बोतल 375 एमएल की बेची जाती है.
– 200-250 बोतल 750 एमएल की बेची जाती है.
– तय कीमत से ज्यादा कीमत पर बेचने से एक शहरी शराब की दुकान को करीब 14-15 हजार की अवैध कमायी होती है.
– कमोबेश ग्रामीण इलाकों में भी यही होता है. यहां बिक्री का आंकड़ा शहर के मुताबिक थोड़ा कम होता है.
– शहरी और ग्रामीण इलाकों के आंकड़ों के एवरेज को देखा गया तो राज्य भर में 550 शराब की दुकाने हैं. 9000 रुपए के एवरेज से भी जोड़ा जाए को कमायी का आंकड़ा 50 लाख के करीब पहुंच जाता है.
रिएलिटी चेकः प्राइस लिस्ट नहीं लगे हैं दुकानों पर
एक अक्टूबर से राज्य में शराब के लिए प्राइस लिस्ट रिवाइज की गयी है. उससे पहले से ही राज्य का शायद ही कोई शराब दुकान हो जहां सरकारी प्राइस लिस्ट लगायी गयी हो. दुकान में बैठा फ्रंटलाइन और शोमुख का कर्मी अपने ही तय दाम पर शराब की बिक्री करता है और मनमाना वसूली करता है.
बोकारो सेक्टर-12: फटी हुई प्राइस लिस्ट लगी थी. जिसे देखने के बाद कुछ नहीं समझा जा सकता है. दुकान के मैनेजर रोशन चौधरी हैं. वो फ्रंटलाइन के कर्मी हैं. उन्होंने किसी तरह की कोई बात करने से मना कर दिया.
रांची हरमू रोड श्याम मंदिर के पास की दुकानः किसी तरह का कोई प्राइस लिस्ट नहीं लगी हुई थी. पूछे जाने पर फ्रंटलाइन के कर्मी संदीप पांडे ने बताया कि आज शाम को लगायी जाएगी. उसने ये भी कहा कि उन्हें सभी शराब की कीमत मालूम है. सभी पर 5 रुपए सरकार की तरफ से बढ़ाया गया है.
रांची अरगोरा चौकः कोई प्राइस लिस्ट नहीं लगी है. हर बोतल पर दुकान में मौजूद कर्मी बढ़ी हुई कीमत वसूलते हैं. पूछे जाने पर कहते हैं कि जल्द ही लिस्ट लगा दी जाएगी.
रामगढ़ न्यू बस स्टैंडः यहां दो दुकान हैं. दोनों दुकान में प्राइस लिस्ट दुकान के अंदर ऐसी जगह लगायी गयी है जहां आम जनता की नजर पहुंच ही नहीं सकती है. दोनों दुकानों में प्राइस लिस्ट से बढ़ी हुई कीमत पर शराब बेची जाती है.
इन ब्रांडों के शराब पर हो रही है ज्यादा वसूली
ब्रांड का नाम 180 एमएल 375 एमएल 750 एमएल
तय दर- कितने में बिक रहा तय दर- कितने में बिक रहा तय दर- कितने में बिक रहा
रॉयल स्टैग 140- 145 280- 290 260- 580
रॉयल चैलेंज 140- 150 290- 300 590- 620
इम्पीरियल ब्लू 120- 125 242- 250 483- 500
100 पाइपर्स 350- 375 690- 720 1350- 1450
व्हाइट मिसचीफ 108 – 120 223 – 240 447 – 460
फ्लैक्स नहीं होने का बहाना बनाया
मैन पावर सप्लाई करने वाली कंपनी के एक वरीय अधिकारी ने बताया कि दुकानों में प्राइस लिस्ट इसलिए नहीं लगायी है, क्योंकि सरकार की तरफ से उन्हें रेट का फ्लैक्स नहीं दिए गए हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि रेट एक अक्टूबर को Revised किया गया है. ऐसे में परेशानी हो रही है.
सरकार की साइट पर भी नहीं है प्राइस लिस्ट
सरकार की साइट www.jsbcl.in पर जाने के बाद भी प्राइस लिस्ट कहीं नहीं मिला. प्राइस लिस्ट के ऑप्शन को क्लिक करने पर जो पेज खुलता है वो ब्लैंक है. अगर किसी को प्राइस लिस्ट देखना है तो उसे अलग तरह के कोड का इस्तेमाल करना होगा. कोड कुछ इस तरह का है. https://164.100.150.10/jsbcl/RateList.aspx इसे समझ पाना किसी आम की बस की बात नहीं है.
पढ़िये क्या कहा विभाग के अधिकारी ने
ऐसी शिकायत मुझे एक मिली है. लेकिन उस शिकायत पर किसी का नाम नहीं लिखा है. लेकिन अगर ऐसी बात है तो सभी दुकानों की जांच होगी. कोई भी दुकान प्राइस लिस्ट नहीं होने का बहाना नहीं बना सकता है. सभी को प्राइस लिस्ट भेजी जा चुकी है. अगर कोई भी दुकान ऐसा करता पाया गया तो उसपर सख्त कार्रवाई होगी.
विनोद शंकर सिंह
उत्पाद आयुक्त सह प्रबंध निदेशक झारखंड, राज्य बिवरेज कॉर्पोरेशन




