News Wing Desk
Ranchi, 07 October : “सबसे ज्यादा बाल गुलामी वाले देश” के तौर पर भारत की छवि विश्व भर में धूमिल होने के बाबत इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) ने मोदी सरकार को आगाह किया है. ख़ुफ़िया विभाग ने सरकार को सलाह दी है कि वैश्विक स्तर पर ऐसे प्रचार का विरोध कूटनीतिक और सूचनाओं के आधार पर करना होगा.
जनसत्ता में छपी जय मजूमदार की रिपोर्ट के अनुसार आईबी ने पिछले हफ्ते ये टिप्पणी प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, विदेश मंत्रालय, श्रम मंत्रालय, और रॉ को भेजा है. इसमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की गुलामी दस्तावेज में भारत को “सबसे ज्यादा गुलामों वाले देश” के रूप में पेश किया गया है. निश्चित तौर पर इससे भारत की छवि खराब होगी जिसका असर हमारे आयात-निर्यात के साथ-साथ विकास दर पर पड़ेगा.
आधुनिक गुलामी का वैश्विक दस्तावेज
बाल मजदूरी, बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी पर अध्ययन के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था आईएलओ ने यह रिपोर्ट ऑस्ट्रेलिया स्थित निजी संस्था वाक फ्री फाउंडेशन (डब्ल्यूएफएफ) के साथ मिलकर तैयार की है.
‘आधुनिक गुलामी का वैश्विक दस्तावेज : जबरिया मजदूरी और विवाह’ नामक रिपोर्ट आईएलओ-डब्ल्यूएफएफ ने 19 सितंबर को जारी की थी. “ग्लोबल एस्टिमेट ऑफ मॉडर्न स्लेवरी: फोर्स्ड लेबर एंड फोर्स्ड मैरीज” साल 2013 से ही इंटरनेशनल सर्वे में भारत को सबसे अधिक गुलामों वाले देश के तौर पर पेश कर रहा है.
कौन हैं आधुनिक गुलाम
भारत में घरेलू कामगार, ठेका मजदूर, कारखानों, खेतों, मछली मारने, यौन व्यापार इत्यादि क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के आधुनिक गुलाम माना गया है. कहा गया है कि आधुनिक गुलामों द्वारा तैयार उत्पादों और सेवाओं का उपभोग कारोबारी तरीकों से ही किया जाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके तैयार किए उत्पाद, खाद्य पदार्थ हम खाते हैं, उनके बनाए कपड़े हम पहनते हैं और बहुत संभव है कि बहुत सारे घर जिनमें हम रह रहे हैं वो उन्होंने बनाए हों.
तथ्यात्मक आंकड़ों के साथ करना होगा विरोध
ख़ुफ़िया विभाग ने सरकार को आगाह किया है कि यूरोपीय कंपनियां ILO-WFF के सर्वे के आधार पर दक्षिण भारत के वस्त्र उद्योग में गुलामी खत्म करने के लिए NGO को फण्ड भी दे रही हैं. इस बाबत आईबी ने सुझाव दिया है कि भारत गुलामी से जुड़े तथ्यात्मक आंकड़ों के आधार पर ILO-WFF की मॉडर्न स्लेवरी रिपोर्ट का विरोध करे. साथ ही आधुनिक गुलामी के सवाल पर भारत की छवि करने वाली इस रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाना होगा.




