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महाराष्ट्र के पूर्व सीएम नारायण राणे का कांग्रेस से इस्तीफा

News Wing

Mumbai, 21 September: महाराष्ट्र के पूर्व सीएम नारायण राणे ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले यह संभावना जताई जा रही थी कि पार्टी विधान परिषद से उनकी सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है. हालांकि बीजेपी की ओर से अभी उन्हें पार्टी में लेने का पक्का वादा नहीं मिला है. कहा जा रहा है कि वे अकेले ही आगे का राजनीतिक सफर तय करने की घोषणा कर सकते हैं. कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि राणे ने खुद ही पार्टी से संबंध खराब कर लिए थे. क्योंकि वे कांग्रेस के टॉप नेताओं के खिलाफ लड़ाई का आह्वान कर रहे थे.

बाल ठाकरे ने शिवसेना से निकाला था

मनोहर जोशी के हटने के बाद बाल ठाकरे ने नारायण राणे को सीएम बनाया था. करीब नौ महीने तक सीएम पद पर रहने के बाद राणे और बाल ठाकरे के बेटे उद्धव के बीच खींचतान होने लगी. दरअसल पार्टी की असली बागड़ोर उस वक्त उद्धव संभालने लगे थे. इसके बाद भाजपा-शिवसेना गठबंधन चुनाव हार गया था और राणे विपक्ष के नेता बन गए. फिर 2005 में राणे को पार्टी से बाल ठाकरे ने यह कहते हुए निकाल दिया कि नेता हटाने और चुनने का अधिकार शिवसेना में उन्हें ही है.

कई आपराधिक मामले हैं दर्ज

कहा जाता है कि 60 के दशक में नारायण राणे मुंबई के चेम्बूर इलाके में सक्रिय ‘हरया-नरया’ गैंग से जुड़े थे. उनके खिलाफ उस दौरान हत्या का एक मामला भी दर्ज हुआ था. उस दौरान ‘हरया-नरया जिंदाबाद’ नाम से एक फिल्म भी बनी थी. नारायण राणे के खिलाफ मुंबई की घटला पुलिस थाने में भी एक एफआईआर दर्ज हुई है. पुलिस रिकार्ड के मुताबिक नारायण राणे जब 14 साल के थे तब उन्होंने गिरोह से जुड़े एक अन्य सक्रिय सदस्य माधव ठाकुर ने बुरी तरह से पिटाई की थी.

पार्षद से सीएम तक का सफर तय किया

थोड़ा बड़ा होने पर राणे ने शिवसेना ज्वाइन की और शाखा प्रमुख बन गए. उसके बाद राणे शिवसेना से पार्षद बने और पार्षद से सीएम तक का सफर पूरा किया. शिवसेना से निकाले जाने के बाद राणे ने कांग्रेस का दामन थाम लिया और मंत्री भी बने. पार्टी छोड़ने के बाद उन्हें शिवसैनिक ‘मुर्गी चोर’ कहकर बुलाने लगे. 2015 में बांद्रा-पूर्व सीट के उपचुनाव में राणे की हार होने के बाद शिवसैनिकों ने मुर्गियां हाथ में लेकर राणे की हार का जश्न मनाया था.

राणे का राजनीतिक सफर

1968: 16 साल की उम्र में शिवसेना से जुड़े

1985 से 1990: शिवसेना के पार्षद बने इसके बाद बेस्ट के अध्यक्ष बने

1990-95 : पहली बार विधायक बने, विधान परिषद के सदस्य भी बने

1996-99: शिवसेना-बीजेपी सरकार में राजस्व मंत्री और इसके बाद मुख्यमंत्री बने

2005:  3 जुलाई 2005 को शिवसेना छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए, कांग्रेस में भी राजस्व मंत्री बने

2007: कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को टक्कर दी

2009: महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री बने

2014: लोकसभा चुनाव में बेटे की हार के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया

 

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