
Ranchi: झारखंड में 1932 के खतियान की मांग के बाद अब आदिवासी धर्म कोड का मामला गरमाता नजर आ रहा है. इस मांग को लेकर 25 अप्रैल को दिल्ली के जंतर मंतर पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया जाएगा. आदिवासी जन परिषद के राष्ट्रीय महासचिव प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि धर्मकोड, संपूर्ण भारतवर्ष के आदिवासियों के लिए धार्मिक एवं सांस्कृतिक की पहचान है. देश भर से आदिवासी समाज के लोग जंतर-मंतर पर जुटकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे. कार्यक्रम में झारखंड से पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव और देव कुमार धान विशेष रूप से शामिल होंगे. प्रेमशाही ने कहा कि भारतवर्ष में आदिवासी समाज प्रकृति पूजक हैं. आदिवासियों की जनसंख्या हिंदू, मुस्लिम, के बाद तृतीय स्थान पर आता है. भारत में आदिवासियों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक मान्यता है. जब पूरे देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध जैन लोगों का अपना-अपना धर्म कोड है. ऐसे में15 करोड़ आदिवासियों को देश में धर्म कोड में से वंचित किया गया है.




