
Gyan Ranjan
Ranchi. डेढ़ दशक पहले देश के सभी टीवी चैनलों पर निरमा वाशिंग पाउडर का प्रचार सुर्ख़ियों पर रहता था. लोगों की जुबान पर भी निरमा का प्रचार छाया रहता था. झारखंड की राजनीति में पिछले डेढ़ महीने से दीपिका, पूर्णिमा, अम्बा, ममता उसी तरह से सुर्ख़ियों में है. वजह है नियुक्ति वर्ष में विभिन्न पदों पर होनेवाली नियुक्तियों में सरकार का फैसला. जिस तरह कपड़ों की सफाई को लेकर निरमा वाशिंग पाउडर एक समय चर्चा में था उसी तरह अभी कांग्रेस की सभी महिला विधायक जेपीएससी सहित सभी नियुक्तियों में सफाई की हिमायती हैं. इन महिला विधायकों ने अपनी ही सरकार के नियुक्ति से सम्बंधित कई मामले पर खुलकर आवाज बुलंद किये हैं. पहले इन विधायकों ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में सरकार केर निर्णयों की मुखालफत की थी और अब जेपीएससी मामले पर भी जांच की मांग कर रही हैं.
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डेढ़ महीने पहले मुख्यमंत्री से मिलकर रखी थी बात
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में दो मामलों पर कांग्रेस की महिला विधायकों ने विरोध किया था. पहला मामला हिंदी, भोजपुरी, अंगिका, मैथिली और मगही भाषा को इन परीक्षा में शामिल नहीं करने का और दुसरा झारखंड से मैट्रिक और इंटर पास करने की बाध्यता का. डेढ़ महीने पहले कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में हिंदी, भोजपुरी, मैथिली, अंगिका और मगही भाषा को शामिल करने की मांग की थी और साथ ही झारखंड से बाहर वैसे लोग जो स्थानीय हैं उन्हें भी इस परीक्षा में स्थानीय का दर्जा देने की मांग की थी.
उस समय मुख्यमंत्री ने विधायकों को आश्वस्त किया था कि सरकार इसपर विचार करेगी. लेकिन डेढ़ महीने के बाद भी इसमें कोई संसोधन नहीं हुआ अलबत्ता कार्मिक विभाग ने एक नया सर्कुलर जारी कर अनुबंध की नौकरियों में भी इसी नियम को लागू कर दिया. जानकारी के अनुसार विधानसभा सत्र से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा बुलाई गयी यूपीए विधायक दल की बैठक में इसी वजह से कांग्रेस के विधायक शामिल नहीं हुए.
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जेपीएससी मुद्दे ने आग में घी डालने का किया काम
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग का मामला अभी सुलझा भी नहीं था कि झारखंड लोकसेवा आयोग की प्रारम्भिक परीक्षा परिणाम का मामला राज्य में राजनीतिक रूप ले लिया है. विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को रंग दे रहा है. छात्र भी आंदोलनरत हैं. यही वजह है कि कांग्रेस के अधिकांश विधायक भी इस बात के हिमायती हैं कि झारखंड लोकसेवा आयोग की परीक्षा की जांच होनी चाहिए. कांग्रेस की महिला विधायकों के आलावा पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बंधू तिर्की, उप नेता प्रदीप यादव, वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव भी जांच के पक्ष में हैं. कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधू तिर्की ने कहा कि सांच को आंच क्या, जेपीएससी की जांच होनी चाहिए.
उन्होंने कांग्रेस विधायकों के यूपीए की बैठक में शामिल नहीं होने पर कहा कि यह छोटी बात नहीं है, बहुत बातों को इशारे में समझना चाहिए. वहीँ कांग्रेस विधायक दल के यू नेता प्रदीप यादव ने कहा कि जेपीएससी अहम् विषय है, अहम् संस्था है. आयोग के क्रियाकलाप पर प्रश्नचिन्ह है. वित्त रामेश्वर उरांव ने तो यहाँ तक कह डाला कि झारखंड में नियुक्ति परीक्षा की स्थिति को देखकर अफ़सोस होता है.
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उन्होंने मुख्यमंत्री की बैठक में नहीं जाने के सवाल पर तो यह कह डाला कि खाना खाने के लिए नहीं गए तो क्या हुआ. विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह ने तो साफ़ शब्दों में कहा कि 49 अभियार्थियों को फेल कर दिया गया है इसकी जांच होनी चाहिए. विधायक दीपिका पाण्डेय सिंह ने कहा कि जनता की आवाज को कहीं भी मजबूत करनी होगी तो हम कांग्रेसी बाध्य हैं. सरकार बाद में है और पहले जनता है. जनता की समस्याओं के समाधान के लिए जिस हद तक भी जाना पड़े पार्टी जाने के लिए तैयार है.




