JharkhandPalamu

पलामू : मगही-भोजपुरी को जेएसएससी में शामिल करने की मांग हुई तेज, पूर्व मंत्री ने की पदयात्रा

Palamu : झारखंड सरकार की नियुक्ति नियमावली में मगही, भोजपुरी, अंगिका और मैथिली को शामिल करने की मांग काफी तेज हो गयी है. सोमवार को गांधी स्मृति नगर भवन में सभा करने के बाद पूर्व मंत्री और इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष के.एन. त्रिपाठी ने पदयात्रा की. मेदिनीनगर शहर के प्रमुख मार्गों से पदयात्रा करते हुए पलामू समाहरणालय पहुंचे और उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा.

इससे पूर्व गांधी स्मृति टाउन हॉल मगही युवक मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित सभा में पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने कहा कि मोर्चा की मांगो का वे पूर्ण रूप से समर्थन करते हैं.

इसे भी पढ़ें:रूपा तिर्की केस: सीबीआइ को मिला कांग्रेस विधायक बंधु तिर्की का ऑडियो, वीडियो टेप, परिजनों को कर रहे हैं ‘मैनेज’- सुनिये ऑडियो..

झारखंड सरकार से मांगों को मानने के लिए बात की जाएगी. पहले भी कुछ मामलों में बात की और कुछ बातें आगे भी होंगी. उन्हें लगता है कि उनकी पार्टी और सरकार भी मांगों के साथ खड़ी होगी. मांगों की लौकिक एवं तर्क सही है.

पूर्व की सरकार ने झारखंड को 13 और 11 जिलों के अनुसार बांटने का कार्य किया था. आंदोलन के कारण सरकार को कानून बदलना पड़ा. हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि यह कानून गलत है.

उसी तरह इस कानून भी बदलना पड़ेगा. झारखंड राज्य में 24 जिले हैं और सभी जिलों में बराबर का अधिकार है. भाषा के आधार पर 12 और 04 भाषाओं में नहीं बांटा जा सकता है.

इसे भी पढ़ें: 27 सितंबर को कृषि कानून के खिलाफ कांग्रेस का भारत बंद

झारखंड सरकार ने जिन 12 भाषाओं को ली है उनमें से अधिकांश भाषाएं बंगाली, बांग्ला, उड़िया खोरठा, नगपुरिया, आसामी यह मगधी प्राकृति प्राचीन भाषा का ही अपभ्रंश है. इसी भाषा से निकलकर के सारी भाषाओं का निर्माण हुआ है.

झारखंड के 24 जिलों के 267 प्रखंड के सवा तीन करोड़ लोगों को ध्यान में रखना होगा तो सरकार कैसे ये कह सकती है कि यह हमारी भाषा नहीं है. झारखंड के लोग जो चयनित 12 भाषाओं को नहीं जानते हैं. उन सभी के लिए यह 4 भाषाओं को रखना ही पड़ेगा.

इसे भी पढ़ें: हैवियस कॉर्पस मामलाः हाइकोर्ट ने किया फैसला- कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में पढ़ेगी नाबालिग

Related Articles

Back to top button