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अब नयी तकनीक से खेती बारी के जरिये अपनी तकदीर बदलेंगी जनजातीय समाज की महिलाएं

JSLPS एवं डिजिटल ग्रीन के बीच हुआ MoU

Ranchi : महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना अंतर्गत आदिवासी महिलाओं की आजीविका और आत्मनिर्भरता के लिए एक और पहल हुई है. JSLPS (झारखंड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी) एवं डिजिटल ग्रीन के बीच ATLAS (एडवासिंग ट्राईबल लाइवलीहुड एंड सेल्फ रिलायंस) प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन को गुरुवार को एमओयू किया गया. जेएसएलपीएस की सीईओ नैंसी सहाय एवं डिजिटल ग्रीन के प्रमुख कृष्णन पल्लासानी ने इस पर साइन किया.

मौके पर नैंसी सहाय ने कहा कि राज्य की करीब 20 हजार आदिवासी महिलाओं को इस पहल के जरिए उन्नत एवं तकनीक आधारित खेती से जोड़ कर उनकी आमदनी में इजाफा किया जा सकेगा. आत्मनिर्भरता की दिशा में वे तेजी से आगे बढ़ेंगी. इस दौरान जेएसएलपीएस के सीओओ बिष्णु परिदा, डिजिटल ग्रीन की रिजनल प्रमुख रोनाली प्रधान, एसपीएम एमकेएसपी आरीफ अख्तर, एटलस पहल के नोडल कमल जायसवाल और अन्य भी उपस्थित थे.

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हड़िया-दारू बेचनेवाली महिलाओं को भी लाभ

नैंसी सहाय के मुताबिक सीएम हेमंत सोरेन के निर्देश पर राज्य में हड़िया दारू निर्माण एवं बिक्री से जुड़ी महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका से जोड़ा जा रहा है. फुलो झानो आशीर्वाद अभियान की लाभुक महिलाओं को भी इस पहल से लाभ होगा. उन्नत तकनीक आधारित खेती, आईसीटी, डेटा एनालिसिस, किसान डायरी एप्प एवं उत्पादक कंपनी के प्रबंधन आदि जैसे कार्यों में भी डिजिटल ग्रीन महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना अंतर्गत कार्य करेगा. उन्होंने डिजिटल ग्रीन से पलाश ब्रांड के मार्केटिंग एवं उत्पादों की बिक्री के लिए भी कार्य करने की अपील की. उम्मीद जतायी कि अब आदिवासी महिला आजीविका सशक्तीकरण की दिशा में सकारात्मक पहल और तेज होगी.

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क्षमता वर्धन पर विशेष जोर

डिजिटल ग्रीन के प्रमुख कृष्णन ने कहा कि जेएसएलपीएस ग्रामीण महिलाओं के विकास के लिए लगातार काम कर रही है. उनकी टीम एवं जेएसएलपीएस के प्रयास से अरहर की खेती करने वाली महिलाओं का उपज तीन गुणा बढ़ाया जा सका है. एटलस परियोजना के तहत डिजिटल ग्रीन का प्रयास राज्य की आदिवासी महिलाओं एवं उत्पादक कंपनियों को आत्मनिर्भर बनाना है. एटलस परियोजना का लक्ष्य राज्य की 20 हजार आदिवासी महिलाओं को तकनीक आधारित उन्नत खेती से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है.

इसके अंतर्गत एफपीओ से जुड़ी महिलाओं को एडवाइजरी सेवाएं, वीडियो आधारित प्रशिक्षण, क्षमतावर्धन जैसे कार्य किये जायेंगे. किसान उत्पादक कंपनियों के क्षमतावर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जायेगा. किसान उत्पादक कंपनियों के कार्यों, सदस्यों की भूमिका, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का रोल, कंपनी के संचालन सहित अन्य जरूरी विषयों पर सदस्यों को वीडियो एवं अन्य तकनीक के जरिए प्रशिक्षित किया जायेगा. किसान डायरी मोबाइल एप्प की सुविधा भी उत्पादक कंपनी के किसानों को मिल सकेगी जिससे उनके मार्केटिंग, संग्रहण एवं अन्य कार्यों से जुड़े डेटा का अनुश्रवण एवं डेटा एनालिसिस में उपयोग होगा. इसी आधार पर उनकी गतिविधियों में और सुधार लाया जा सकेगा.

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